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मेरी पेशानी पर उभरी हुई तहरीर को पढ़ लो...

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भदोही। बज्मे गुलशने अदब के जानिब से रविवार की रात मोहल्ला कजियाना स्थित एक प्रतिष्ठान में एजाजी नशिस्त का आयोजन किया गया। जलील खां ‘मजनू भदोहवीं’ की सदारत में हुए कार्यक्रम में मध्य प्रदेश से आए मेहमान शायर सेराज जबलपूरी का इस्तकबाल किया गया। शायरों ने अपने कलामों से लोगों की वाहवाही लूटी। जमील खां ने कहा कि कोरोना से लोग मानसिक रूप से परेशान हुए हैं। ऐसे लोगों को साहित्य रूपी टानिक राहत पहुंचाने का काम करेगी। उन्होंने अपनी गजल ‘मेरी पेशानी पर उभरी हुई तहरीर को पढ़ लो, मेरी आंखों में देखो डूबती तनवीर को पढ़ लो। पिला कर आबे जमजम कांपते हाथों से अब मजनू, किताबे जिंदगी की आखिरी तहरीर को पढ़ लो’ से लोगों की दाद हासिल की। गौहर सिकंदरपूरी ने कहा ‘मैं लड़खड़ा तो जाता था गिरना न था कभी- अम्मा की ऊंगुलियों का इशारा अजीब था।’ शमशाद करीमी ने सुनाया ‘बारिश का लुत्फ लेते रहे शहर के अमीर- टपका है मुझ गरीब का छप्पर तमाम रात’। निजामत कर रहे कैसर जौनपूरी ने सुनाया ‘फिर जमाने में मुहब्बत की फिजा रौशन करें। तीरगी मिट जाएगी बस एक दिया रौशन करें’। इस दौरान अखलाक सैयद, शाबान करीमी, जावेद आसिम, फैज भदोहवीं, समी कैसर, वाहिद अंसारी, नौशाद शम्सी, हसनैन जौनपुरी ने भी अपने कलाम सुनाए।
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