सीतामढ़ी। क्षेत्र के बारीपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा का पाठ चल रहा है। कथा के छठे दिन शुक्रवार को कथावाचक श्याम सुंदर महराज ने महारास लीला का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीव और ब्रह्म का मिलन ही महारास है। रास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है, जिसमें दु:ख, शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है। महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ। कथा सुनाते हुए कहा कि पंचगीत भागवत के पंच प्राण हैं, जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव से पार हो जाता है तथा उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है।
रास जीव का ब्रह्म से मिलन की कथा है। काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस मौके पर राहुल दूबे, पूनम तिवारी, देवी प्रसाद तिवारी, राजाराम तिवारी, रामप्यारे शुक्ल, विजय शंकर दूबे, विनोद शुक्ला, मनोज तिवारी, रमेश तिवारी, बीरू तिवारी आदि मौजूद रहे।