गंगा के जल स्तर में तेज गति से वृद्धि हो रही है। 10 सेमी प्रति घंटे के तेज गति से बढ़ रहे जल स्तर ने खतरे की घंटी बजा दी है। गंगा तटीय गांव के लोगों की धड़कने भी बढ़ने लगी है। रविवार रात आठ बजे गंगा का जल स्तर 74 मीटर पार कर गया। महज चार दिनों में जलस्तर में साढ़े छह मीटर का इजाफा हुआ। जलस्तर बढ़ने से गंगा तरी में बोई गई 500 बीघे परवल की खेती डूबकर नष्ट हो गई। मानसूनी बारिश संग टौंस और यमुना का पानी छोड़े जाने से गंगा के जल स्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। महज चार दिनों में ही जल स्तर में साढ़े छह मीटर से अधिक बढ़ गया। इससे उफनाई गंगा की लहरें किनारों पर हिलोरे मारने लगी हैं। शनिवार को केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज पर जल स्तर आठ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था और रात आठ बजे तक जल स्तर 72.120 मीटर पर पहुंच गया। रविवार को सुबह तेजी से जलस्तर में बढ़ोतरी हुई। जुलाई माह में गंगा का जल स्तर काफी कम था। बुधवार को गंगा का जल स्तर 67.460 मीटर पर था। रात से जल स्तर में बढ़ोतरी शुरू हुई और बृहस्पतिवार सुबह 15 सेंटीमीटर प्रति घंटे की तेज गति से बढ़ाव के साथ जल स्तर 70.530 मीटर पर पहुंच गया । केंद्रीय जल आयोग के मीटर गेज कार्यालय से प्राप्त आंकड़े पर गौर करें तो रविवार को 10 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जल स्तर रात 74 मीटर पार कर गया। गंगा का जल स्तर बढ़ने से कोनिया के गंगा की तरी में बड़े पैमाने पर बोई गई परवल सब्जी की फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गई। कोनिया के डीघ, बनकट, मवैया थान सिंह, चकिया, धनतुलसी, छेछुआ भुर्रा आदि गावों के गंगा की तरी में लगभग 500 बीघे परवल सब्जी की खेती की जाती है। गंगा का पानी बढ़ते ही सब्जियां पानी में डूब कर नष्ट हो गई। तेजी से बढ़ते जलस्तर ने तटीय गांव के लोगों की धड़कने बढ़ा दी है। अभी खतरे के निशान 82 मीटर से जलस्तर काफी नीचे है, लेकिन जिस गति से बढ़ रहा है उससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।