हाफिज परवेज अच्छेपेश इमाम। स्रोत- स्वयं
भदोही। मुकद्दस रमजान का सातवां रोजा बुधवार को पूरा हो गया। रमजान में अल्लाह की बेपनाह रहमतें बटोरने के लिए छोटे बच्चों से लेकर बड़े पुरुष और महिलाएं सुबह से लेकर शाम तक अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं। देखा जाए तो रमजान में सबसे बड़ी इबादत रमजान और उसके बाद नमाजे तरावीह को मानी गई है। इन दिनों नगर की मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहती हैं। इतना ही नहीं हर रोज मस्जिदों में पेश इमाम अपनी तकरीर में लोगों को अच्छा इंसान बनने और गरीबों, यतीमों की सेवा करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। तकिया कल्लन शाह जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज परवेज अच्छे मियां ने कहा कि माह-ए-रमजान आत्मा को शुद्ध करने का बड़ा जरिया है। यह महीना इबादत कर अल्लाह से करीब होने का रास्ता दिखाता है। उन्होंने कहा कि रोजा रखना केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि अच्छा काम करके बुराई को त्यागने और नेकी कमाने का नाम है। पेश इमाम ने कहा कि सच्चा मुसलमान वहीं है जो इस पवित्र महीने की कद्र करें। अधिक से अधिक नेकी कर सके। बताया कि इसी मुकद्दस महीने में ही पवित्र कुरआन नाजिल हुआ। इस महीने कुरआन की तिलावत करना भी बड़े सवाब का काम है। इस महीने की गई हर नेकी के बदले अल्लाह कई गुना बढ़ा देता है। यही वह महीना है जिसमे अल्लाह बंदों पर खास रहमत करता है। पेश इमाम ने बताया कि मुकद्दस रमजान के महीने में एक बहुत ही मुबारक रात्रि होती है। जिसे शबे कद्र कहा गया है। यह एक रात हजार महीनों के बेहतर होती है। हर मुसलमान को चाहिए कि पूरे रमजान इस रात को ढूंढे और रात भर इबादत करे। इस रात इबादत जन्नत की गारंटी होती है।