जीवन की सार्थकता श्रीराम के भजन में है। जो ईश्वर का भजन करता है वह संसार का सबसे भाग्यवान कहलाता है और जो ईश भजन नहीं करता वह अभागा है। मानव तन ईश्वर के भजन के लिए मिला है। यह बातें चकभवानीदासपुर गांव स्थित शिव मंदिर पर चल रहे पांच दिवसीय रामकथा के आखिरी दिन कर्मयोगी पं. प्रमोद शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि राम नाम जपने से श्रेष्ठ है रामकाज करना।
हनुमान की व्याख्या करते हुए कहा कि उनके अंदर समर्पण की भावना रही। वह हमेशा राम नाम जपने के साथ ही रामकाज करने के लिए तत्पर रहते। समापन के दौरान राधेकृष्ण मिश्र, सीताराम, मोहन यादव, संजय, हीरालाल, दयाशंकर, रामजीत आदि लोगों ने हवन-पूजन किया। जय श्रीराम के जयकारे संग कार्यक्रम संपन्न हुआ।