इसमें जिलेभर से जुटे विविध क्षेत्र के विविध विद्वानों, विशेषज्ञों ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार के उपाय पर विस्तृत चर्चा किया।
जनपद के नोडल अधिकारी प्राचार्य डॉ.हिरेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में चली घंटेभर से अधिक समय तक बैठक में उच्चशिक्षा गुणवत्ता का सुझाव दिया गया।
अभिशासन में सुधार, सार्वजनिक राज्य विश्वविद्यालयों की शिक्षा प्रणाली में बदलाव, पुन:संरचना, सुधार संभावनाएं, बढ़ती बेरोजगारी से उच्च शिक्षा में कौशल विकास को जोडने, उच्चतर शिक्षा की सुलभता, गतिशील भागेदारी, क्षेत्रीय असमानता दूर करने, लैंगिग भेदभाव कम करने, उच्चतर शिक्षा को समाज से जोडने, उत्तम शिक्षकों का निर्माण, छात्र सहायता प्रणाली बनाए रखने, सांस्कृतिक एकता, आदान प्रदान, मान्यताओं, प्रथाओं, रीति-रीवाजों में समन्वय करके भाषा के माध्यम से बढ़ावा देना। शिक्षा का विस्तार, और निजी क्षेत्र के साथ सहभागिता में प्रोत्साहन पर चर्चा हुई। नई शिक्षानीति बिंदुओं पर बौद्धिक बहस में देर तक तर्को से प्रतिवाद होता रहा। डॉ.पीएन डोंगरे ने तार्किक सुझाव देकर सुधार के उपाय बताए। तो डॉ. श्रीनिवास पांडेय ने अपने तर्को से तमाम बातें किसद्ध किया। वहीं डॉ.सविता भरद्वाज, आलिया रिफत, डॉ. आरएन शर्मा ने प्रासंगिकता पर राय जाहिर किया। कुशल संचालन डॉ.कमाल अहमद सिद्दीकी ने किया। इस मौके पर डॉ.त्रिनेत्रराम, डॉ.संजय पांडेय, डॉ. राजकुमार पाठक, मंजू देवी, डॉ. कामिनी वर्मा, डॉ. रश्मि सिंह, डॉ. रोशन प्रसाद, अशोक कुमार यादव, डॉ. डीएन सिंह, डॉ. किरन शर्मा आदि रहे।