महराजगंज। औराई ब्लॉक के गुलालपुर में आयोजित शिवमहापुराण कथा में कथा व्यास 1008 रतन वशिष्ठ महाराज ने नारदमोह, सती चरित्र, चंचुला कथा और देवराज ब्राह्मण प्रसंग का वर्णन किया गया। बताया कि अहंकार और मोह मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं, जबकि सती चरित्र के माध्यम से माता सती के त्याग, पतिव्रता धर्म और भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को जीवन का आदर्श बताया। कहा कि चंचुला प्रसंग के माध्यम से उन्होंने विशेष रूप से गुरू की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि बिना गुरु दीक्षा के न तो पुराण कथा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और न ही किसी भी धार्मिक आयोजन का सच्चा लाभ मिल पाता है। बताया कि जब तक जीवन में योग्य गुरु का मार्गदर्शन नहीं होता, तब तक भक्ति भी अधूरी रहती है और सच्चा आध्यात्मिक उत्थान संभव नहीं होता। बताया कि सत्संग और शिवकथा श्रवण के प्रभाव से उनके जीवन में परिवर्तन आया और अंततः उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। मुख्य यजमान लालजी मिश्रा ने व्यासपीठ की आरती उतारी। इस मौके पर भोलानाथ मिश्रा, शिवशंकर मिश्रा, सुभाष मिश्रा, लक्ष्मीशंकर, प्रेमशंकर, रविशंकर मिश्रा आदि रहे।