चौरी। थाना क्षेत्र के गरूलपुर में प्रतिमा विसर्जन को लेकर हुए बवाल में पुलिस उलझ गई है। रविवार को पुलिसकर्मी मानसिंहपुर में पहुंचकर ग्रामीणों से बयान दर्ज किए। जिसमें मानसिंहपुर की बजाए गरूलपुर की प्रतिमा को जलना बताया जा रहा है। बवाल से इन्कार करने वाली पुलिस तालाब की बजाए चार किमी दूर लठिया में क्यों प्रतिमा का विसर्जन कराया। इसको लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं।
शनिवार को गरूलपुर तालाब में पहले की तरह मानसिंहपुर और गरूलपुर में स्थापित पंडाल की मूर्तियों का विसर्जन होना था। ग्रामीणों के अनुसार जब मूर्ति विसर्जन के लिए तालाब पर पहुंचे तो गरुलपुर वालों ने विसर्जन करने के लिए मना करने लगे। इस बात को लेकर मारपीट हो गई और पुलिस को लाठी भांजना पड़ा।
जिसके बाद पुलिस ने मानसिंहपुर की मूर्ति का विसर्जन तीन किलोमीटर दूर लठिया नहर में कराकर मामले को शांत कराया। पुलिस ने इस मामले में एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए मानसिंहपुर के चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया था।
रविवार को पुलिस विसर्जन के लिए नहीं बल्कि पुरानी रंजिश, पट्टा और जमीनी विवाद को लेकर हुई मारपीट का मामला बता रही है। पुलिस पंडाल जलने की बात गरुलपुर में दिखा रही है, जबकि पंडाल मानसिंहपुर में जला है। सवाल यह भी उठता है कि अगर विसर्जन के लिए कोई बवाल नहीं हुआ था तो हर बार की तरह इस बार मूर्ति का विसर्जन तालाब से चार किलोमीटर दूर लठिया नहर में क्यों कराया गया।
घटना के बाद जो ग्रामीणों पुलिस पर आरोप लगा रहे थे, अब वो कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। बताया जा रहा है कि एक पूर्व विधायक के स्थानीय रिश्तेदार के दबाव में ही ग्रामीणों का बयान बदलवा गया है। सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस द्वारा जारी वीडियो सही है, तो घटना के बाद वीडियो में दिए गए ग्रामीणों के बयान क्या झूठे हैं।