जिले के 17 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। बदलते मौसम का असर है कि मौसमी बीमारी के मरीजों की भरमार रही। मेले में 2041 रिकॉर्ड मरीज पहुंचे। जिनकी जांच कर दवा उपलब्ध कराई गई। इसमें 844 पुरुष, 774 महिला और 423 बच्चों का उपचार किया गया। 429 गोल्डन कार्ड भी बनाए गए। रविवार को विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अमर उजाला की टीम ने स्वास्थ्य मेले की पड़ताल की। जहां व्यवस्थाएं बदहाल मिलीं। स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सक नदारद रहे, फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल चल रहा है। अन्य सेंटर पर आयुष विभाग के कर्मचारी भी नदारद मिले। जिससे लाभार्थियों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड भी बनने में दिक्कत हुई।
स्वास्थ्यकर्मियों के इन हरकतों से विभाग के आलाधिकारी अनभिज्ञ हैं। पड़ताल के दौरान देखा गया कि कई केंद्रों पर मरीज चिकित्सक के इंतजार में बैठे हैं। स्टाॅल पर दवाएं नजर नहीं आईं। दोपहर 12 बजे पीएचसी करियाव पर अमर उजाला की टीम पहुंची। तब तक 35 मरीज देखे गए थे। डॉक्टर के नदारद होने पर फार्मासिस्ट अनिल कुमार राजपूत ने कमान संभाल रखा था। मरीजों की जांच कर दवा उपलब्ध करा रहे थे। डूहिया की सोनी देवी दवा लेने आई थीं, जिनके पेट में दर्द था। डॉक्टर के न होने से मजबूरी में फार्मासिस्ट से दवा लीं।
इसी तरह आदर्श कुमार ने भी दवा ली। टीम दोपहर 1:15 बजे दुर्गागंज पीएचसी पहुंची, जहां 26 मरीज देखे गए थे, लेकिन आयुष विभाग की टीम मेले से नदारद रही। इससे आयुष्मान कार्ड बनवाने में लोगों को दिक्कत हुई। टीम 12:20 बजे चकटोडर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची, जहां 22 मरीजों का उपचार किया गया। 11:40 बजे टीम अर्बन पीएचसी गोपीगंज पहुंची, जहां डॉ. अखिलेश सिंह कमान संभाल रखे थे। 12 बजे तक 36 मरीज देखे गए। 11:10 बजे सेमराध पीएचसी और 1:40 पर कसियासपुर पीएचसी पर टीम पहुंची।
जिलाधिकारी विशाल सिंह का सख्त निर्देश है कि मेले में आयुष विभाग और आयुर्वेद विभाग की टीम प्रतिभाग करें, लेकिन यहां दोनों टीम प्रतिभाग नहीं कर रही है। इस मौके पर डॉ. मोहम्मद परवेज, दर्पण मिश्रा, संजय कुमार, इंद्र भूषण पांडेय, श्यामू, सुनीता यादव आदि मौजूद रहे।