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गंगा का जलस्तर घटने लोगों ने ली राहत की सांस

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गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही गिरावट से तटवर्ती गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। गंगा से सटे गांवों में बोई करीब डेढ़ हजार बीघे की फसल जलभराव से नष्ट हो चुकी है। खेतों से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे खिसक गया है। बाढ़ का पानी कम होने से घाटों पर नौकाओं का संचालन शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग मिर्जापुर की ओर से सीतामढ़ी मिश्रपुर गंगा घाट पर नाव और स्टीमर का संचालन नहीं हो सका है, जिसके कारण यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। करीब 10 दिनों तक गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण तटवर्ती 30 से अधिक गांवों में पानी पहुंच गया था। लोगों को दूसरे जगह शरण लेनी पड़ी है। बृहस्पतिवार सुबह से जलस्तर में घटाव शुरू हुआ जो अब भी जारी है। इससे बाढ़ के पानी में डूबी फसलें दिखने लगी है, लेकिन सप्ताह भर से अधिक समय तक डूबी अरहर, तिलहनी संग धान की फसल सड़ चुकी है। किसानों के मुताबिक करीब डेढ़ हजार बीघे फसल बाढ़ में नष्ट हो गई। भाजपा विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी के आश्वासन के बाद किसानों में मुआवजा मिलने की आस जगी है। गांवों में बलुई मिट्टी होने से कीचड़ नहीं है लेकिन गंगा घाटों पर कीचड़ और गंदगी की स्थिति बन गई है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी कार्यालय के अनुसार जलस्तर में लगभग चार मीटर की कमी हुई है। सोमवार को शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 76.140 मीटर तक आ गया था। जलस्तर में पांच सेंटीमीटर घंटे का घटाव हो रहा है। इटहरा, मनीपुर, कलिक मवैया, हरिरामपुर आदि गांवों से गंगा बाढ़ का पानी खिसक गया है लेकिन दुर्गंध और सड़ांध से लोग परेशान है। इन गांवों में संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका है।
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