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धान खरीद: तहसीलों की लापरवाही, डेढ़ हजार किसानों का सत्यापन ही नहीं

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राजस्व विभाग की लापरवाही से धान खरीद रफ्तार नहीं पकड़ रही है। तहसीलों की लापरवाही से डेढ़ हजार किसानों का सत्यापन नहीं हो सका। इससे वह अपनी उपज क्रय केंद्रों पर नहीं बेच सके। एक सप्ताह से लेकर 10 दिन पूर्व पंजीकरण कराने वाले किसान विभागीय चक्कर में घनचक्कर हो जा रहे हैं।
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जिले में धान खरीद शुरू हुए करीब दो माह से अधिक का समय गुजर गया लेकिन खरीद की रफ्तार अब तक बढ़ नहीं सकी है। 53 केंद्रों पर चल रही खरीद में अब तक 66,000 के सापेक्ष मात्र 27,000 एमटी खरीद हो सकी है। क्रय केंद्रों पर पहुंचने से पूर्व किसानों को तमाम परेशानियों से जुझना पड़ता है। जिले में धान बिक्री के लिए 7,640 किसानों ने पंजीयन कराया है। इसके सापेक्ष 1,513 किसानों का अब तक सत्यापन नहीं हो सका है। इससे वह क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने नहीं पहुंच पा रहे हैं। बताते चलें कि धान बेचने के लिए किसान और भूमि का सत्यापन जरूरी है। बगैर सत्यापन धान खरीद नहीं हो सकती। सत्यापन तहसील से ऑनलाइन होता है। इसमें कई दिन लग रहे हैं। किसान परेशान हैं। जिला विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि डेढ़ हजार किसानों का सत्यापन नहीं हो सका है। इसके लिए तहसील स्तरीय अधिकारियों से बात हो रही है।

इनसेट
क्या बोले किसान
अभोली ब्लॉक के गुआली गांव निवासी किसान सतिराज सिंह ने बताया कि उन्होंने 25 दिसंबर को जनसेवा केंद्र पर रजिस्ट्रेशन कराया। अब तक सत्यापन नहीं हो सका है। गड़ौरा के कृष्णकांत और शशिकांत ने बताया कि 48 घंटे में सत्यापन का समय तय है लेकिन सात दिन बाद सत्यापन हुआ। किसान अजय सिंह ने कहा सरकार डिजिटल की बात करती है लेकिन धरातल पर हकीकत जुदा है। ऑनलाइन और सत्यापन के नाम पर किसानों का शोषण किया जा रहा है। एक महीने से ज्यादा दिन ऑनलाइन पंजीकरण कराए हो गए हैं। फिर भी अभी तक तहसील स्तर से सत्यापन नहीं किया गया है। अब भी पोर्टल पर मामले लंबित हैं। किसानों ने कहा कि दो दिन में सत्यापन नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
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