ज्ञानपुर। जिले में री-वैंप योजना के तहत जर्जर तारों को बदलने की मुहिम धीमी हो गई है। तीन साल में जर्जर तार नहीं बदले गए। ग्रामीण इलाकों में सड़क किनारे जमीन से चंद फीट ऊपर तार लटकते हुए मिल जाएंगे। गाजीपुर में एक दिन पूर्व की लटकते हाईटेंशन के तार की चपेट में आने से बस आग में आग लग गई थी। झुलसने से पांच लोगों की मौत हो गई थी। दर्दनाक हादसे के बावजूद जिले में बिजली विभाग के अधिकारियों की तंद्रा नहीं टूटी है। अभोली के भौथर, अर्जुनपुर में सड़क के किनारे जमीन से मात्र सात फीट ऊपर नंगे तार लटक रहे हैं। यहां कभी भी वाहन तार से टकरा सकते हैं। गाजीपुर घटना की पुनरावृति हो सकती है। अधिकारियों की उदासीनता से अप्रिय घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
जिले में भदोही और ज्ञानपुर विद्युत वितरण खंड से करीब 120 फीडर जुड़े हैं। जिससे 546 ग्राम पंचायतों के एक हजार से अधिक राजस्व गांव, दो नगर पालिका, पांच नगर पंचायत, तीन तहसील, छह ब्लॉक तक घरेलू और कामर्शियल बिजली पहुंचती है। करीब 20 हजार किलोमीटर क्षेत्र में एचटी-एलटी तार, एक लाख से अधिक खंभे, ट्रांसफार्मर से कंट्रोलिंग व्यवस्था पर निगरानी रखी जाती है। इसके बावजूद विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में 60 फीसदी तक उपकरणों एवं तारों की हालत दयनीय हो चुकी है। जर्जर तारों को बदलने के लिए वर्ष 2020-21 में री-वैंप योजना शुरू की गई। योजना के तीन साल गुजर गए ग्रामीणों इलाकों में जर्जर तार नहीं बदले गए। हल्की बारिश और हवाओं के चलने से पेड़ के डाल तार गिर जाते हैं। इससे तार लटक जाते हैं।
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दो साल में आठ की गई जान, कई मवेशी मरे
ज्ञानपुर। जर्जर लटकते तार और खंभों के कारण करंट से गुजरे दो साल में आठ से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों मवेशी भी काल कवलित हो चुके हैं। बिजली विभाग समय रहते नहीं चेता तो गर्मी में यह संख्या बढ़ जाएगी। अभी जनवरी 2024 में डीघ ब्लॉक के सरायजगदीश में एक टेंटकर्मी की करंट से जान चली गई थी। जर्जर तार खंभे में सट रहा था, जिससे उतरे करंट की चपेट में कर्मी आ गया।
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री-वैप योजना से जर्जर तार और खंभे बदले जा रहे हैं। गर्मी से पहले ग्रामीण इलाकों में जर्जर खंभे और तार बदल दिए जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। - अशोक कुमार, अधीक्षण अभियंता।