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जर्जर भवनों में दफ्तर, सांसत में कर्मचारी से अफसर

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ज्ञानपुर। जनपद सृजन के ढाई दशक बाद भी कई सरकारी दफ्तरों को खुद का भवन नसीब नहीं हो सका है। जर्जर भवनों में ही कार्यालय संचालित हो रहे हैं। व्यवस्था न होने से एक बार फिर बारिश में जान जोखिम में डालकर उन्हीं भवनों में गुजारना होगा। आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों की हालत तो सबसे अधिक खराब है। बारिश में इन जर्जर भवनों में एक से दो फीट तक पानी भर जाता है। 30 जून 1994 में वाराणसी से अलग होकर भदोही जिला अस्तित्व में आया। जनपद बनने के बाद कलेक्ट्रेट, विकास भवन समेत अधिकतर विभाग खुद के भवनों में चले गए, लेकिन कई सरकारी दफ्तर पुरानी सरकारी भवनों और किराए के भवनों में आज भी संचालित हैं। ज्ञानपुर नगर के खादी आश्रम गली में तीन दशक से किराए के कमरे में संचालित हो रहे अल्पसंख्यक कार्यालय में कर्मचारी जान को जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। खिसकते गर्डरों को देखकर कार्यालय की दशा का पता चल जाता है। पुरानी कलेक्ट्री स्थित डीएसओ, सेवायोजन कार्यालय, विपणन, डीएचओ, डूडा कार्यालयों की हालत देखने भर से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदार दफ्तरों, कालोनियों को लेकर कितने चिंतित हैं। जिले के अलग-अलग स्थानों पर संचालित 26 आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों की दशा भी खराब है। कंडम घोषित हो चुके अस्पतालों में अब भी कर्मचारी बैठकर मरीजों को जरूरी दवाएं देते हैं।
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