ज्ञानपुर। अब गांव की समस्या गांव में ही निपटेगी। राजस्व से जुड़े मामलों संग आय-जाति, खसरा-खतौनी के लिए ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह सब कार्य गांव में ही पूर्ण कराए जाएंगे। इसके लिए लेखपाल और सचिव पंचायत भवन में बैठकर अपना बस्ता सजाएंगे। इससे अधिकारियों का सिरदर्द कम होगा, जबकि ग्रामीण पैसों के साथ समय की बचत कर सकेंगे। डीएम ने ग्राम समाधान दिवस के लिए सप्ताह के चार दिन का रोस्टर जारी किया है। इसको तत्काल प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।
जिले की 546 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय बनकर तैयार हो रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाएं न होने से जरूरी कागजात वहां से नहीं बन पाते। ग्रामीणों को सहज जन सेवा केंद्रों पर जाना पड़ता है। इसके अलावा राजस्व से जुड़े मामलों का निस्तारण कराने के लिए तहसील, समाधान और संपूर्ण समाधान दिवस की तरफ रुख करना पड़ता है। अभी तक मामूली कागजात के लिए भी ग्रामीणों को तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। गांवों में भूमि विवाद के बाद खसरा-खतौनी, आय और जाति प्रमाण पत्रों को लेकर सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीण तहसील में लेखपालों, सचिव के चक्कर काटते हैं। उसके बाद उन्हें प्रमाण पत्र मिल पाते हैं। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने सप्ताह के चार दिन गांव के पंचायत भवन में लेखपालों को बैठकर जन समस्या का निस्तारण करने का निर्देश दिया है। इसका रोस्टर भी जारी कर दिया है। सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को लेखपाल अपनी अलग-अलग पंचायतों में बैठेंगे। शनिवार को संपूर्ण या समाधान दिवस, मंगलवार को तहसील और रविवार को अवकाश रहेगा। डीएम ने तीनों एसडीएम को पत्र जारी कर इसे प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। यहां लेखपाल के बैठने का समय, मोबाइल नंबर और दिन को अंकित किया गया है। इससे ग्रामीणों को सहूलियत मिल सकेगी।
ग्राम समाधान दिवस का चार दिन का रोस्टर
ज्ञानपुर। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की ओर से ग्राम पंचायतों मे लेखपालों के बैठने का चार दिन का रोस्टर बनाया है। इसमें सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार शामिल हैं। चारों तिथियों पर लेखपाल अपनी अलग-अलग पंचायतों में मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे।
तीन माह पूर्व एक लेखपाल ने शुरू की थी पहल
ज्ञानपुर। भदोही तहसील के लेखपाल रजनीश बघेल ने तीन माह पूर्व ग्राम समाधान दिवस की शुरूआत की थी। कुसौड़ा गांव में सचिव संग जन शिकायतें सुनी। उसके बाद वह हर बुधवार को अलग-अलग पंचायतों में समस्याओं का निस्तारण किया।