फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब स्कूलों की दीवारें बताएंगी किस विषय की है मान्यता

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर। मान्यता न होने के बाद भी दूसरे विद्यालयों से अटैच कर परीक्षा फार्म भरवाने वाले स्कूल संचालकों की अब नहीं चलेगी। स्कूलों की लापरवाही के कारण बोर्ड की परीक्षा में सैकड़ों छात्र-छात्राएं परीक्षा से वंचित हो गए। अब जिस विषय की मान्यता होगी उसी में ही स्कूल प्रवेश ले सकेंगे। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही दीवारों पर पेंटिंग भी करानी होगी। बताना होगा कि किस विषय की मान्यता है। जिले में 35 राजकीय, 25 वित्तपोषित और 123 वित्तविहीन समेत कुल 183 माध्यमिक और इंटर कॉलेज संचालित हैं। इसमें मान्यता लेने वाले वित्तविहीन विद्यालयों के संचालक जिस विषय की मान्यता नहीं होती उसमें भी छात्र-छात्राओं का प्रवेश दूसरे कॉलेज से अटैच करा कर लेते हैं। शिक्षा विभाग के दावों के बीच अटैचमेंट का खेल चल रहा है। बोर्ड परीक्षा में जिले के दर्जन भर से अधिक छात्र-छात्राएं स्कूलों की लापरवाही से परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। प्रदेश भर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को स्कूल संचालकों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा। इसके बाद शासन ने ऐसे प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया। शिक्षा विभाग इसको अमल में लाने में जुट गया है। डीआईओएस कार्यालय से सभी वित्तविहीन स्कूल के प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर मान्यता लेने वाले विषयों में प्रवेश कराने का निर्देश दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षक एनएल गुप्ता ने बताया कि वित्तविहीन स्कूलों के दीवार पर मान्यता वाले विषय की वालपेटिंग कराई जाएगी। इससे छात्र-छात्राएं भ्रमित नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याएं वित्तविहीन स्कूलों में होती है। इस पर रोक लगाने के लिए विभागीय स्तर से सख्ती की जाएगी। बोर्ड परीक्षा के बाद जिले में शुरू हुई प्रायोगिक परीक्षा के दौरान शिक्षा विभाग संग छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। बोर्ड परीक्षा में केंद्र बने 25 से अधिक विद्यालयों में विषय की मान्यता न होने से छात्र-छात्राओं को अलग-अलग कॉलेजों में भटकना पड़ा। जिन स्कूलों में विज्ञान की मान्यता नहीं थी उनमें भी प्रवेश लिया था। भूगोल और गृह विज्ञान की मान्यता न लेने वाले स्कूलों ने भी इसी तरह प्रवेश लिया था। इसके कारण छात्र-छात्राओं को परीक्षा के लिए दूसरे कॉलेजों में भेजा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें