भदोही। भारतीय कालीनों में ज्वलनशीलता और उनमें प्रतिबंधित रसायनों की जांच अब शहर में स्थित भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में ही हो सकेगी। पहले कालीनों को टेस्टिंग के लिए नई दिल्ली भेजना पड़ता था। केंद्र सरकार ने संस्थान में विभिन्न टेस्टिंग लैब के उच्चीकृत करने और कुछ नए मापदंड के टेस्टिंग लैब की स्थापना की योजना के तहत कई उपकरण स्थापित कराए हैं। फिलहाल टेस्टिंग को अंतिम रूप दिया जा रहा है जो शीघ्र ही कालीन निर्यातकों के लिए उपलब्ध होगा। संस्थान के निदेशक डॉ.राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि विश्व के कई देशों में कालीनों तथा उनमें प्रयुक्त होने वाले धागों की ज्वलनशीलता तथा उनमें इस्तेमाल हो रहे रसायनों के प्रयोग से पर्यावरण तथा जनजीवन को हो रहे नुकसान को लेकर वैश्विक स्तर पर तेजी से लोग गंभीर हो रहे हैं। यही कारण है कि कालीन आयातक देश विशेष रूप से अमरीकी समुदाय कालीनों की ज्वलनशीलता और रसायनों के उपयोग की जांच के बाद ही कालीन खरीद रहे हैं। बताया कि यह चलन धीरे-धीरे और देशों में तेजी से बढ़ रहा है।
बताया कि एक निश्चित डिग्री तक हम टेस्टिंग करके किसी कालीन की ज्वलनशीलता बताने के अलावा कालीन में कौन-कौन से प्रतिबंधित रयासनों का उपयोग हुआ है, दीमक अथवा कीड़े से कालीन कितना सुरक्षित हैं, कीटनाशकों का कितना प्रयोग किया गया है आदि की जांच की व्यवस्था में करने जा रहे हैं। निदेशक ने कहा कि जो टेस्टिंग व्यवस्था हम देने जा रहे हैं उसके लिए हमारे कालीन निर्यातकों को दिल्ली भेजना पड़ता था। इसलिए माना जा रहा है कि यह व्यवस्था आसपास के कालीन उद्यमियों के लिए काफी लाभप्रद होगा।