प्रेम का भक्ति से संयोग करते हुए कहा कि इस संसार में प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं। ऋषि-मुनियों ने भी कहा है कि सबसे ऊंची प्रेम सगाई।
कथा मर्मज्ञ ने कहा कि जब तक जीव शुद्ध नहीं होता, तब तक परमात्मा की कृपादृष्टि नहीं होती। भगवान श्रीकृष्ण और दासी पुत्र विदुर की चर्चा करते हुए कहा कि विदुर को यह विश्वास नहीं था कि उन्हें भगवान का दर्शन होगा। भगवान का रथ आता देखकर विदुर ने सोचा कि हम पर भगवान की दृष्टि कैसे पड़ सकती है। मगर, भगवान की आंखें सिर्फ विदुर की ओर ही थीं। जैसे ही दोनों के नेत्र मिले, विदुर और उनकी पत्नी सुलभा की आंखें भर गईं। भगवान ने हमेेेशा भक्तों से प्रेम किया है। इस मौके पर रामसजीवन, ब्रह्मजीत शुक्ला, गोपाल उपाध्याय, कल्लू तिवारी, डा. सूर्यमणि यादव आदि मौजूद रहे।