भदोही। भारत से विदेशों को निर्यात होने वाला कालीन 60 प्रतिशत भदोही जिले में उत्पादित होता है। केंद्र सरकार द्वारा भदोही कालीन नगरी को ‘टाऊन आफ एक्सपोर्ट एक्सिलेंस’ घोषित किया गया है, लेकिन यह एक तमगा भर सिद्ध हुआ है। इसका कोई लाभ भदोही नगर वासियों को नहीं मिला। इसी टाऊन आफ एक्सपोर्ट एक्सिलेंस में एक अदद पार्क भी नहीं है। यह कमी यहां के बड़े बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों को खटकती चली आ रही है। भदोही नगर में कुल 25 वार्ड और आबादी लगभग एक लाख है। हालांकि आगामी दिसंबर में जब चुनाव होगा तो दायरा बढ़ चुका होगा और यहां की आबादी लगभग डेढ़ लाख और वार्ड भी उसी अनुपात में बढ़ कर 40 के आसपास हो चुके होंगे। लेकिन विडंबना यह है कि अब तक पालिका क्षेत्र के लोगों को एक अदद पार्क की व्यवस्था नहीं हो सकी है। नागरिकों का कहना है कि खानपान और रहन-सहन के चलते आदमी की सेहत लगातार गिरती जा रही है। चिकित्सक के पास जाने पर चिकित्सक नियमित प्रात: योग करने और पैदल घूमने को कहते हैं। लेकिन शहर में पार्क की कमी होने से लोगों को स्टेशन रोड, चौरी रोड, मेनरोड मर्यादपट्टी, रजपूरा, जमुनीपुर आदि में हर सुबह पैदल तो चलते हैं लेकिन आते जाते वाहनों से दुर्घटना का भय बना रहता है। प्रतिदिन सुबह चार बजे से आठ बजे तक भारी संख्या में लोगों को विभिन्न मार्गों पर पैदल चलते हुए देखा जा सकता है। इससे पता लगता है कि यहां के लोगों को एक अदद पार्क की कितनी आवश्यकता है। नगर के मर्यादपट्टी में मेला की बारी में एक तालाब और उसके चारों ओर घूमने के लिए पार्क बनाने की कवायद जरूर शुरू की गई थी लेकिन उक्त जमीन विवाद की भेंट चढ़ जाने से मामला बाधित हो गया। तब से लेकर आज तक कोई और प्रयास फिलहाल नहीं हो सका है।