ज्ञानपुर। कालीन नगरी को लॉकडाउन की बंदिशों से फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही। केंद्र सरकार से जरूरी दुकानें खोलने की एडवाइजरी जारी होने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि जिलाधिकारी अपने विवेक से ग्रीन जोन वाले जिले में दुकानें खुलवा सकते हैं। लेकिन, शनिवार को जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि जब तक इस संबंध में राज्य सरकार से कोई आदेश नहीं आएगा, दुकानें नहीं खुलेंगी। 23 मार्च से लॉकडाउन शुरू होने के बाद से जिले की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। 10 अप्रैल को भदोही के नेशनल इंटर कॉलेज में बनाए गए शेल्टर होम में बिहार का एक युवक पॉजिटिव मिलने के बाद प्रशासनिक सतर्कता और बढ़ा दी गई। वाहनों की चेकिंग के साथ-साथ जिले की सीमा पर आवाजाही पर शिकंजा कसा गया। जरूरी सामान की खरीदारी में सुबह सात से 10 बजे तक की छूट दी गई। लेकिन, बाजार आर्थिक तंगी से जूझने लगा है। किराना, दवा को छोड़कर अन्य दुकानदारों की समस्याओं के मद्देनजर शनिवार को केंद्र सरकार ने जिला प्रशासन के विवेक पर दुकानें खोलने की एडवाइजरी जारी की। इससे उम्मीद जताई जाने लगी थी कि अब भदोही जिले की दुकानें भी खुल जाएंगी। मगर ऐसा नहीं हुआ। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार की एडवाइजरी जारी हुई है, मगर अब तक प्रदेश शासन का कोई आदेश-निर्देश इस संबंध में नहीं आया है। ऐसे में फिलहाल अन्य दुकानें खोलने की कोई मंशा नहीं है। प्रदेश शासन से निर्देश आने के बाद इस संबंध में पहल की जाएगी। उधर कारोबार जगत लॉकडाउन खुलने के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं। युवा कालीन कारोबारी सुमित सिंह कहते हैं कि ऑर्डर पेंडिंग पड़े हैं। इससे आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है। एक निश्चित वर्करों के साथ कामकाज को शुरू करने की छूट मिलनी चाहिए। अन्यथा कारोबारियों के साथ-साथ कामगारों के सामने भी संकट पैदा होगा। सराफा कारोबारी संगम सेठ का कहना है कि लॉकडाउन लंबा चला तो दुकानदारों की आर्थिक सेहत बिगड़ जाएगी। कुछ शर्तों के साथ लॉकडाउन में छूट मिलनी चाहिए। आगे शादी-ब्याह का सीजन आ रहा है। इसी में कारोबार को संजीवनी मिल सकती है, अन्यथा नुकसान हो जाएगा।