ज्ञानपुर। जिले की 20 लाख आबादी पर एक भी कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। यहां कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही सृजित नहीं हुआ है। ठंड के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ह्रदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण नियमित जांच के लिए भी मरीजों को वाराणसी या प्रयागराज जाना पड़ता है।
जिले में महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्साल और सौ शैय्या अस्पताल के साथ छह सीएचसी और 17 पीएचसी हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लगभग 160 निजी अस्पताल भी पंजीकृत है। विडंबना यह है कि इतनी स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद जिले में एक अदद कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। जिले के किसी सरकारी अस्पतालों में तो कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही स्वीकृत नहीं है, तैनाती दूर की बात है। निजी अस्पताल की करें तो यहां भी ऐसा ही हाल है। किसी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ आते भी हैं तो हफ्ते में एक दिन।
सर्दी के दिनों में हृदय रोग के संबंधी मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। रक्त की धमनियों के जमने से हृदय घात का खतरा रहता है। जिले में हर 25 से 30 आदमी के बाद एक व्यक्ति हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में इन लोगों को रूटीन चेकअप के लिए भी वाराणसी-प्रयागराज जैसे अस्पतालों में जाना पड़ता है। अगर हार्ट के मरीजों को जब कोई अटैक आता है तो उन्हें तत्काल उपचार नहीं मिल पाता। गौर करने वाली बात है कि हार्ट के मरीजों को त्वरित उपचार मिलना बेहद जरूरी होता है। सरकारी अस्पतालों में अगर हार्ट की समस्या से जुड़े मरीज पहुंचते भी हैं तो उनका केवल ईसीजी हो पाता है। कई बार मरीजों को समय से उपचार न मिलने के कारण उनकी जान पर बन आती है। सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि जिले में कार्डियोलॉजिस्ट का एक भी पद नहीं है। पद सृजन से लेकर नियुक्ति का सारा कार्य शासन का होता है। वहीं से चिकित्सकों की तैनाती भी होती है। हालांकि अगर अस्पताल में कोई मरीज पहुंचता है तो फिजिशियन प्राथमिक उपचार कर रेफर कर देते हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि ठंड के मौसम में नसें सिकुड़कर सख्त हो जाती हैं। इन्हें नॉर्मल करने के लिए शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ता है और इससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। दिल पर दबाव पड़ता है जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।
केस 1- ज्ञानपुर के शिवरामपुर निवासी 77 वर्षीय हीरावती देवी बीते तीन सालों से हार्ट की समस्या से जूझ रही हैं। उनको हर एक महीने रूटीन चेकअप कराना पड़ता है। इसके लिए उन्हें प्रयागराज जाना होता है। बोलीं कि अगर जिले में चिकित्सक होते तो परेशानी न उठानी पड़ती।
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केस 2- ज्ञानपुर निवासी बच्चन की उम्र 55 साल हैं। वे बीते छह महीने से हार्ट की समस्या से जूझ रहे हैं। वे बीएचयू में अपना उपचार करा रहे हैं। शुरू में तो हर सप्ताह जाना होता था, लेकिन अब एक महीने में एक बार जाना होता है। बताया कि अगर जिले में ह्रदय के डॉक्टर होते तो काफी राहत होती।