पंचायत चुनाव को अभी तीन महीने पूरे नहीं हुए, लेकिन गांवों में प्रधान और सचिव का खेल शुरू हो गया। गांव के निजाम बदलते ही करीब 45 हजार लोगों का नाम राशन कार्ड की पात्रता सूची से गायब हो गए। इसको लेकर विरोध के सुर भी तेज हो गए। डीएम, डीएसओ संग एसडीएम कार्यालयों में 500 से अधिक शिकायतें आ चुकी है। जिले में दो मई को पंचायत चुनाव की मतगणना हुई तो 546 ग्राम पंचायतों में 500 से अधिक में नए प्रधान हो गए। शपथ ग्रहण में प्रधानों ने भले ही सभी को साथ लेकर चलने का दावा किया, लेकिन धरातल पर हकीकत जुदा है। जिसकी शुरूआत राशन कार्ड से शुरू हो गई। गांवों में प्रधान के इशारे पर सचिव और रोजगार सेवक की रिपोर्ट पर पात्रता सूची से कुछ अपात्र तो अधिक संख्या में पात्रों का नाम ही गायब हो गया है। डीघ के शिवनाथपट्टी की ब्राह्मण बस्ती में सौ, लखनों में 80, पिपरिस की बिंद बस्ती में 20, मिश्राईनपुर में 30, सरायहोला में 25, मसुधी में 35 लोगों का नाम पात्रता सूची में नहीं है। करीब एक पखवारे में जिले की तीनों तहसील, डीएम के जनता दर्शन, डीएसओ कार्यालय में 500 से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी है। जिसमें ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रधान और सचिव के तालमेल से उनका नाम काटा है। पिपरिस की निर्मला देवी ने कहा कि उनका छह यूनिट का कार्ड था। परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। अचानक उनका नाम पात्रता सूची से हटा दिया गया। पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में भले ही अपात्रों संग पात्रों का नाम काटा जा रहा है, लेकिन लखपति और करोड़पति अंत्योदय कार्डधारकों के खिलाफ पूर्ति विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। पूर्ति निरीक्षक संग सत्यापन करने वाले अधिकारी-कर्मचारी तालमेल बनाकर शांत हो जा रहे हैं।