गोपीगंज। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में पर्यटकों से भरी टैंपो ट्रैवेलर अलकनंदा नदी में पलटने से जिन 12 पर्यटकों की मौत हुई थी उसमें जिले के भवानीपुर उपरवार का रहने वाले सॉफ्वेयर इंजीनियर शेखर पांडेय भी शामिल है। 15 साल पहले पति इसके बाद इकलौते बेटे की मौत से शिक्षामित्र निर्मला पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मां निर्मला ने शिक्षामित्र की नौकरी कर बेटे और बेटी की परिवरिश की। उच्च शिक्षा दिलाई। बेटे की मौत ने निर्मला को अंदर से तोड़ कर रख दिया है। परिवार में अब निर्मला के साथ उनकी बेटी ही रह गई है। मृतक के चाचा संगललाल ने रुद्रप्रयाग पहुंचने के बाद शव की शिनाख्त की। उसके बाद मौत की पुष्टि हो सकी।
गोपीगंज के भवानीपुर उपरवार निवासी शेखर पांडेय (26) होनहार था। पिता नवीन पांडेय की मौत 15 साल पहले ही हो चुकी थी। परिवार में मां और बहन की जिम्मेदारी शेखर के ऊपर ही थी। पुणे के कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर शेखर की बहन दिल्ली में एमबीए पढ़ रही है। कुछ दिन पहले ही शेखर पुणे के मित्रों के साथ उत्तराखंड घूमने गया था। शनिवार को रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा नदी में टैंपो ट्रैवलर पलटने से जान गंवाने वाले 12 पर्यटकों में शेखर भी शामिल था। शनिवार शाम जब घटना की जानकारी हुई तो कोई यह बात मानने को तैयार नहीं था। रविवार को शेखर के चाचा रुद्रप्रयाग पहुंचकर शव की शिनाख्त किए। शेखर की मौत की पुष्टि हुई। चाचा संगम लाल पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड पुलिस से भतीजे की मौत की जानकारी मिली, लेकिन हमें विश्वास नहीं होता कि ऐसी कोई घटना हुई है। बहरहाल भतीजे का मोबाइल भी पुलिस के पास ही है। सोमवार को उसका शव गांव पहुंचेगा।
गांव में नहीं जला चूल्हा
होनहार शेखर का अचानक चला जाना न सिर्फ परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, बल्कि पूरे गांव को सदमे की तरह लगा है। शेखर के मौत की पुष्टि के बाद रविवार को किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। शेखर की मौत से मां निर्मला और बहन एकदम अकेली हो गई हैं। दोनों दुख देखकर गांव का हर व्यक्ति गमगीन है।