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रोजी-रोटी से हिंदी को जोड़ने की जरूरत

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ज्ञानपुर। हिंदी दिवस पर मंगलवार को विभिन्न संगठनों की ओर से गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें हिंदी के उत्थान और विकास पर चर्चा की गई। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में विशेषज्ञों ने हिंदी के विकास का संकल्प लिया। हिंदी साहित्य परिषद की ओर से भुड़की गांव में विचार गोष्ठी हुई। इसमें वरिष्ठ साहित्यकार पारसनाथ मिश्र ने कहा कि आजादी के सात दशक बाद हिंदी का जो उत्थान होना चाहिए था वह नहीं हो सका। सचिव सुरेश पांडेय मंजुल ने कहा कि हिंदी का वैश्विक प्रचार-प्रसार हो रहा है। जरूरत है कि हिंदी को रोजी-रोटी से जोड़ा जाए। कन्हैयालाल दूबे ने गीतों के माध्यम से कहा कि हिंदी दिवस पर हिंदी के प्रमियों आओ सुकीर्ति का दीप जलाएं। पं. दीनानाथ पाठक, अर्जुन मुसाफिर, विपुल पाठक, सभाजीत पाठक, रोहित, रमाशंकर पाठक ने भी विचार व्यक्त किए। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में हिंदी दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञ डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने राजभाषा हिंदी के विकास के लिए शपथ दिलाई। इस मौके पर एके चतुर्वेदी, आरपी चौधरी, प्राचार समर बहादुर आदि रहे। आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय ज्ञानपुर में हिंदी दिवस पर मानिक चंद्र यादव ने बच्चों को हिंदी के प्रति जागरूक किया। कहा कि 1949 में संविधान सभा ने संघ की राष्ट्रभाषा हिंदी के आगे किया। बच्चों ने बड़े ही मनोरंजक रूप में कविता पाठ और गीत गाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। अंत में बच्चों को पेन, पेंसिल, रबर और कटर देकर उत्साहवर्धन किया गया। इस मौके पर सुभाष चन्द्र, विनोद कुमार, रीमा चौहान आदि रहे।
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