सीतामढ़ी। श्री सीताधाम मौनी बाबा आश्रम में श्री रामकथा के पांचवें दिन कथा वाचिका डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने कहा कि श्री राम के आदर्शों के साथ हम सभी को मां सीता जी के व्यक्तित्व से सीख लेने की आवश्यकता है। कहा कि राजा जनक के दरबार में जब राम और लक्ष्मण दोनों भाई पहुंचे तो मिथिलावासी आश्चर्य चकित हो गए। सीता की सखियां तरह-तरह की बातें कर रही थी, क्योंकि सीता के विवाह के लिए धनुष तोड़ने की शर्त रखी गई। बड़े-बड़े योद्धा धनुष को तोड़ने के लिए आए थे परंतु धनुष को हिला भी नहीं सके। गुरू से आज्ञा लेकर जब रामचंद्र जी धनुष के पास गए तो धनुष आसानी से उठ गया। धरती माता खुद नीचे हो गई और रामचंद्र जी ने बड़ी ही आसानी से एक ही झटके में धनुष को तोड़ दिया। महर्षि वाल्मीकि आश्रम में साधना त्रिपाठी, मानस प्रवीण मनोज चौबे आदि ने भक्तों को श्री राम कथा का अमृतरस पान कराया।
नौ दिवसीय विविध धार्मिक अनुष्ठानों के भव्य आयोजन से धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सीतामढ़ी का कोना-कोना भक्ति रस में तर बतर है। महर्षि वाल्मीकि आश्रम, श्री सीताधाम मौनीबाबा आश्रम में चल रहे श्री रामकथा, भजन, प्रवचन, प्रभु संकीर्तन आदि धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।