गोपीगंज। मुकद्दस माह-ए-रमजान के तीसरे असरे का दौर अंतिम चरण में है। मस्जिदों में पढ़ी जा रही विशेष नमाज तरावीह-कुरआन मुकम्मल होने का सिलसिला जारी है। शनिवार की रात में भी शाही मस्जिद सराय मोहाल में विशेष नमाज तरावीह के मुकम्मल होने पर नमाजियों ने हाफिज अतारजा अत्तारी को माला पहनाकर स्वागत किया और माह-ए-रमजान की फजीलत को बारगाहे इलाही में स्वीकार करने की दुआ मांगी। हाफ़िज अनिसुल कदारी ने कहा कि मुबारक माह रमजान में अल्लाह नेकियां देते हैं, गुनाहों से तौबा करने की मगफिरत। तीसरे असरे का शुभारंभ 21वें रोजे से शुरु होकर ईद का चांद दिखने तक चलता है। रोजेदार आखिरी अशरे के समापन तक अल्लाह की इबादत में पूरा समय देते हैं। कुरआन सातवें अध्याय की सूरह उनाम की 64वीं आयत में पैगंबर-ए-इस्लाम ने फरमाया है कि आप मुराद हजरत मोहम्मद से कह दो कि अल्लाह ही तुमको निजात देगा। मतलब यह कि अल्लाह ही हर रंजो-गम और दोजख से लोगों को निजात दिला सकता है। अल्लाह के नजदीक और दोजख से निजात पाने का तरीका सब्र और सदाकत के साथ रखा गया रोजा, की गई इबादत है। इस मौके हाफ़िज अशरफ, मौलाना आवेश मुफ़्ती आफ़ताब आलम, सरताज सिद्दीकी, अनीस फ़ारूक़ी, मौलाना दिलशाद, वारिस मोआज्जिम, साजिद अली आदि रहे।