गंगा किनारे डेरवा स्थित प्राचीन शीतला मां का भव्य शृंगार। संवाद
ज्ञानपुर। चैत्र नवरात्र के छठवें दिन मंगलवार को घरों और मंदिरों में देवी के कात्यायनी स्वरूप का पूजन किया गया। मंदिरों में देवी भक्त मां की स्तुति करने में लीन रहे। भोर से रात दर्शन पूजन के लिए मंदिर में भीड़ लगी रही। घरों और जिले के प्रमुख मंदिरों में माता के कात्यायनी स्वरूप का चमेली के फूलों से शृंगार किया गया। इसके बाद शहद का भोग लगाया गया। ज्ञानपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर में विराजमान मां काली, मां संतोषी, ज्ञानपुर के पुरानी बाजार में भुडुकी स्थित माता घोपईला मंदिर, गोपीगंज के प्राचीन दुर्गा मंदिर, औराई के मां शारदा मंदिर, सीतामढ़ी, जंगीगंज, दुर्गाागंज, वहिदानगर, ऊंज, सुरियावां, भदोही, चौरी, नई बाजार में शीतला माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिरों में मां की तीनों पहर की आरती की गई। आचार्य शरद पांडेय ने बताया कि नव दुर्गाओं में मां कात्यायनी का महत्व और शक्तियां अनंत हैं। मां को शहद का भोग अर्पित करने से जीवन में हमेशा शांति बनी रहता है।