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बेटियों ने मां को छोड़ा बेसहारा,मानवता हुई तार-तार

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सीतामढ़ी। उम्र के जिस पड़ाव पर अपनों का सहारा और सेवा, प्यार की बेहद जरूरत हो, उस समय जब खुद की बेटियां ही अपनी देवी तुल्य मां का परित्याग कर दें तो सारे रिश्ते-नाते न सिर्फ तार-तार हो जाते है बल्कि मां-बेटी के पवित्र रिश्तों पर भी प्रश्न चिह्न लग जाते हैं। 80 वर्षीया वयोवृद्ध गेना देवी को उसके अपनों ने जो दु:ख दर्द दिया है, उससे न सिर्फ मानवता तार-तार हो गई, बल्कि पवित्र रिश्ते भी कलंकित हो जाते हैं। ऊंज थाना क्षेत्र की नवधन गांव निवासी वयोवृद्ध महिला गेना देवी (80) न ठीक से चल पाती है न बोल पाती है। एक एक शब्द बोलने में हांफने लगती हैं। बूढ़ी आंखों से झरझर गिरते आंसुओं के बूंद जीवन की कड़वी सच्चाई खुद ब खुद बयां करता रहा। बुढ़ापे के इस कठिन हालात में जब अपनों के सहारे और सेवा भाव की जरूरत है तो बेदर्द व पत्थर दिल उसके अपनों ने ही इस बृद्धा मां को जिस हालात में सोमवार को सीतामढ़ी में महर्षि वाल्मीकि आश्रम परिसर में बेसहारा छोड़ गए उससे मानवता भी कांप उठे। ऐसे कठिन हालात में वृद्धा मां के सहारा बने महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंथ पं. हरि प्रसाद मिश्रा जिन्होंने वृद्धा को आश्रम में शरण दी है। बिलखते हुए रुक रुक कर बृद्धा गेना देवी ने बताया कि उसके पति इस दुनिया में नहीं है घर जमीन बेचकर दो पुत्रियों की शादी कर दी है कोई पुत्र नही है। अब उसे कोई सहारा देने वाला नहीं है उसकी बेटियां भी किनारा कर ली हैं। उसके परिजन ही सोमवार को उसे यहां लावारिस हाल में बेसहारा छोड़ दिया और खुद रफूचक्कर हो गए। मंगलवार को ग्रामीणों ने कोइरौना पुलिस को सूचना दी। चौकी इंचार्ज सीतामढ़ी अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि बृद्धा को टेम्पो से उसके गांव नवधन भेज दिया गया है।
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