ज्ञानपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मानव सृजन दिवस घट गया है। 2022 में 17 लाख 68 हजार मानव दिवस का लक्ष्य मिला था, जबकि 2023 में यह 14 लाख नौ हजार पहुंच गया। जिससे जॉबकार्ड धारकों को उम्मीद के मुताबिक काम दिलाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जिले में वर्ष 2008-09 में चालू की गई थी। इस योजना में जिले के सभी छह विकास खंड में 2,81,051 श्रमिकों ने पंजीयन कराया था। प्रारंभिक दौर में लोगों ने काम कराया और श्रमिकों को फायदा भी हुआ, लेकिन साल दर साल 100 दिन काम देना मजदूरों को मुश्किल हो गया। आलम यह है कि पांच से सात फीसदी मजदूरों को भी 100 दिन काम नहीं मिल पाता। करीब एक लाख मजदूरों का 15 साल बाद भी बैंक खाता नंबर उपलब्ध नहीं हो पाया। इस बात से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना को लेकर अधिकारी कितने संवेदनशील हैं। जब बैंक खाता ही नहीं है तो निश्चित रूप से इतने श्रमिकों को अभी तक काम भी नहीं मिल पाया है। वित्तीय वर्ष 2009-10 में सर्वाधिक 85 करोड़ रुपये खर्च कर जनपद प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा, हालांकि उसके बाद प्रगति ठीक नहीं हो सकी। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो 2022 में करीब 90 हजार श्रमिकों को काम मिला। इसमें आठ से नौ हजार श्रमिक ऐसे थे जिनको 100 दिन काम मिला। किसी को 20, किसी को 50 और किसी को 60 दिन ही काम नसीब हुआ। अब 2023 में करीब ढाई लाख मानव दिवस का लक्ष्य कम होने से जॉब कार्डधारकों की परेशानी बढ़नी तय है। उपायुक्त मनरेगा राजाराम का कहना है कि शासन से ही लक्ष्य कम किया गया है। वर्तमान में 30 से 35 हजार श्रमिकों को लगातार काम मिल रहा है।