भदोही शहर के पुरानी बाटा गली में बदहाल स्थिति में पहुंच चुके डस्टबिन
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ज्ञानपुर। नगरों को स्वच्छ और स्मार्ट बनाने की मुहिम निकायों की लापरवाही से पटरी से उतर चुकी है। हर साल लाखों रुपये खर्च कर खरीदे गए डस्टबिन या खुद ही कूड़ा हो गए या गायब हो गए। जिसको लेकर निकाय अनजान बने हुए हैं। ऐसे में जिलें में स्वच्छता मिशन कार्यक्रम का उद्देश्य सफल नहीं हो पा रहा है। जबकि डस्टबिन का लेखा जोखा देने में अधिकारी कतरा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरों में ईधर-उधर कूड़ा फेंकने से रोकने के लिए सूखा और गीला कूड़ा निस्तारण के लिए हरा और नीला डस्टबिन खरीदा गया। नगर पालिका गोपीगंज, भदोही, नगर पंचायत ज्ञानपुर, खमरिया, घोसिया, सुरियावां और नई बाजार में वार्ड के हिसाब से एक करोड़ से अधिक रकम खर्च कर एक हजार से अधिक डस्टबिन की खरीद हुई। शुरूआती दिनों में तो नगर निकायों ने निगरारी रखी, लेकिन समय गुजरने के साथ डस्टबीन से ध्यान हटा लिया। जिससे अधिकतर स्थानों पर लगे डस्टबीन या तो टूटकर खराब हो गए या गायब हो गए। जिससे दुकानों और घरों से निकलने वाला कूड़ा सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर ही फेंका जा रहा है। कई मोहल्लों में तीन-चार दिन तो कहीं हफ्तों बाद कूड़ा उठता है। ऐसे में कचरे से भरे कूड़ेदान के बाहर गंदगी बिखरती है। लोग भी दूर से ही कूड़ेदान की ओर कूड़ा उछालकर चले जाते हैं। जिम्मेदारों की यह लापरवाही स्वच्छता अभियान पर भारी पड़ रही है। निकायों के आंकड़ो पर गौर करें तो डस्टबीन खरीद के लिए भदोही नगर पालिका में तीन साल में 22 लाख, नई बाजार में 13 लाख, सुरियावां में 20 लाख, खमरिया नगर में 70 लाख, ज्ञानपुर में 10 लाख, घोसिया में 15 लाख से अधिक की रकम खर्च की गई। गोपीगंज नगर पालिका ने लेखाजोखा देने में ही आनाकानी की। सातों नगर निकायों में करीब डेढ़ करोड़ की डस्टबीन खरीद हुई, लेकिन धरातल पर स्थिति सही नहीं है। एसडीएम भदोही शैलेंद्र मिश्र ने बताया कि सभी निकायों में स्वच्छता के लिए डस्टबीन की खरीद हुई थी। खमरिया में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की गई है। अन्य नगर पालिका और नगर पंचायतों से डस्टबीन को लेकर जानकारी ली जाएगी।