गोपीगंज। गोपीगंज की बघेल रामलीला समिति की ओर आयोजित होने वाली सैकड़ों वर्ष पुराने सीता क्रिया मेले में पुरूषों का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। दशहरा के एक दिन बाद आयोजित मेले में सभी जिम्मेदारियां महिलाएं ही निभाती हैं। दुकान और सुरक्षा बूथ पर महिला ही दिखती है। पुरूष सैकड़ों से सीता क्रिया मेले माता सीता की शपथ सुनने वंचित है। यह बात प्रसंग को खास बनाती है। प्रसंग माता सीता की अग्निपरीक्षा पर आधारित है। मेले में पुरूषों का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। यहां तक इस मेले में लगने वाले दुकानों पर भी महिलाएं ही होती हैं। बघेल रामलीला समिति के अखिलेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि मेले में पुरूषों का प्रवेश प्रतिबंध को लेकर कोई स्पष्ट मत नहीं है, लेकिन यह परंपरा बाप-दादा के जमाने से चला आ रहा है। बताया कि यह मेला विजयादशमी के दूसरे दिन आयोजित होता है। इस मेले में माता सीता की अग्निपरीक्षा का मंचन होता है। लोग इसे सीता की शपथ के नाम से पुकारते हैं। मेले के संचालन के लिए महिला कांस्टेबलों की ड्यूटी लगाई जाती है। मेले में हर साल शामिल होने वाली गोपीगंज निवासी उर्मिला, अंजू और माया ने बताया कि माता सीता की शपथ का मंचन देखकर मेले में मौजूद हर महिलाओं की आंखे नम हो जाती हैं।