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ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के लिए नहीं मिल रही जमीन

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ज्ञानपुर। जिले में स्वचालित ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के लिए जमीन नहीं मिल रही है। साल भर पूर्व से योजना को धरातल पर लाने के लिए परिवहन विभाग प्रयास कर रहा है। जिला मुख्यालय से 10 किमी की दूरी में ही इसका निर्माण किए जाने की बाध्यता के कारण भी मामला फंस रहा है। दुपहिया, चार पहिया और बड़े वाहनों का लाइसेंस बनवाने के लिए हर रोज एआरटीओ कार्यालय पर बड़ी संख्या में आवेदक आते हैं। टेस्ट के बाद ही लाइसेंस बनाने का प्रावधान है। शासन के निर्देश पर ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण के लिए एक साल पूर्व जमीन की शुरू हुई खोज अभी पूरी नहीं हो सकी। डीघ के दरवांसी और भदोही के मूंसी में जमीन चिह्नित की गई थी, लेकिन मुख्यालय से दूूरी अधिक होने और तकनीकी समस्याओं के चलते इसे निरस्त कर दिया गया। परिवहन विभाग के अनुसार, मुख्यालय से 10 किमी क्षेत्र में ही इसका निर्माण किया जाना है। जमीन मिलने पर ट्रैक बनाने का काम शुरू हो सकेगा। टेस्टिंग ट्रैक पर वाहन चालकों का परीक्षण कंप्यूटर करेगा। ड्राइविंग टेस्टिंग आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित ट्रैक पर की जाएगी। नई व्यवस्था में लाइसेंस बनवाने के लिए गाड़ी चलाकर दिखाना पड़ेगा। वाहन को दाएं बाएं करने के अलावा स्पीड एवं अन्य उपकरणों को आपरेट करने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, यह कंप्यूटर ही बताएगा। नई व्यवस्था में कार्यालय भवन निर्माण के लिए 4000 वर्ग मीटर, ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक के निर्माण के लिए 1025.18 वर्ग मीटर एवं फिटनेस पीट निर्माण के लिए 308 वर्ग मीटर जमीन चाहिए। इस प्रकार कुल 5333.18 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है। जिला प्रशासन को भूमि चिह्नित करने के लिए पत्र लिखा गया है। पूर्व में दो स्थानों पर जमीन देखी गई लेकिन वह ट्रैक के लिए सही नहीं थी। - अरुण कुमार- एआरटीओ
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