जिले की 11 ग्राम पंचायतों में 45 लाख के घोटाले में फंसे एडीओ पंचायत डीघ अजय पांडेय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। जिन फर्मों के खातों में रकम भेजी गई हैं उनमें कुछ फर्जी हैं। आरटीआई से मांगी गई सूचना में इसका खुलासा हुआ। दरअसल धरातल पर कई गांवों में स्ट्रीट लाइटें लगी नहीं, लेकिन उसका भुगतान हो चुका है। गांवों के बेहतर विकास पर केंद्र और प्रदेश सरकार का विशेष फोकस होता है। जिसके लिए अलग-अलग मदों से हर साल करोड़ों रुपये जारी होता है, लेकिन अफसरों की घपलेबाजी से धरातल पर योजनाएं उतर नहीं पाती। विकास खंड डीघ में तैनात सहायक विकास अधिकारी पंचायत अजय पांडेय ने निलंबित सचिव के एफटीओ से 11 ग्राम पंचायतों में 45.33 लाख का घोटाला सामने आने के बाद उच्चाधिकारी सख्त हो गए हैं। एडीओ का नाम एक और धांधली से जुड़ गया है। विजय ट्रेडर्स एंड इलेक्ट्रानिक्स गुड्स छतमी नामक फर्म के नाम पर कई लाख रुपये जारी हो गए। स्ट्रीट लाइट समेत अन्य कार्य की रकम संबंधित फर्म को दिया गया, लेकिन यह फर्म कहीं पंजीकृत ही नहीं है। अधिवक्ता योगेश कुमार पांडेय की ओर से आरटीआई के तहत वाणिज्यकर विभाग से मांगी गई सूचना में यह बात सामने आई। यही नहीं सोनैचा गांव में बिना स्ट्रीट लाइट लगाए ही कई लाख आहरित कर लिया गया। बिजली विभाग की ओर से दी गई सूचना में यह बात सामने आई। यह तो एक बानगी है। कई ग्राम पंचायतों इस स्तर पर गड़बड़ी की गई है। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि एडीओ के कार्यकाल में जितनी फर्मों को पैसे भेजे गए हैं, सभी की जांच कराई जा रही है। 45 लाख के घपलेबाजी में एडीओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश देने के साथ ही निलंबन की संस्तुति की गई है।