ज्ञानपुर। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में तकनीकी और व्यवसायिक शिक्षा के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान कम हो रहा है। यही वजह से की कुल 25 आईटीआई में आठ ट्रेडों की 630 सीटें खाली रह गईं। छात्र-छात्राओं को वेल्डर, पेंटर, सीन टेक्नाेलाजी समेत पांच ट्रेडों में रुझान कम हो रहा है। इलेक्टि्रशियन और मैकेनिकल ट्रेडों पर ज्यादातर सीटें फुल हुई हैं। जिले में तीन राजकीय और 22 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं। इनमें 5330 सीटें हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी 4700 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। राजकीय में करीब आठ से 10 ट्रेड, जबकि निजी में सिर्फ इलेक्ट्रिशियन, फीटर का ट्रेड चलता है। जुलाई से चल रहा प्रवेश एक माह पूर्व ही खत्म हो गया लेकिन तकनीकी शिक्षा के इन केंद्रों की सीटें पूरी नहीं हो सकीं। 10 से 15 फीसदीं सीटें खाली रह गईं। राजकीय में सरफेस ऑर्नामेंटेशन टेक्नीक, इलेक्ट्रॉनिक्स मेकेनिक, इन्फॉर्मेशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी सिस्टम मेंटनेंस (आईसीटी), वेल्डर और वुडवर्क ट्रेड में अभ्यर्थियों का रुझान काफी कम हुआ है। इन ट्रेडों में बहुत कम सीटें भरी हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिशियन, फिल्टर और एमएमवी व्हीकल में अभ्यर्थियों ने खासी रुचि दिखाई है। वहीं निजी आईटीआई में फीटर के ट्रेड में सीटें खाली रह गईं। राजकीय आईटीआई के सापेक्ष निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में तमाम सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। एक से डेढ़ दशक पूर्व तक निजी आईटीआई में प्रवेश के लिए मारामारी होती लेकिन अब सीटें नहीं भर पा रही है। अधिकतर स्थानों पर न तो प्रैक्टिकल की बेहतर सुविधा है और न ही विशेषज्ञ। जिससे युवाओं का रुझान राजकीय आईटीआई और पॉलिटेक्निक के प्रति अधिक रहता है।