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1989 में पहली बार आधी आबादी ने ठोकी थी चुनावी ताल

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ज्ञानपुर। आधी आबादी की भूमिका लोकतंत्र की मजबूती में हर बार होती है। महिलाएं बड़े ही उत्साह के साथ वोटिंग करती हैं। कालीन नगरी में तो पुरुषों से वोट देने के मामले में महिलाएं आगे ही रहती हैं, लेकिन चुनाव लड़ने के मामले में अभी काफी पीछे हैं। 1952 से लेकर अब तक के हुए चुनावों में (उपचुनाव छोड़कर) महज 21 महिलाओं ने ही ताल ठोकी है। पहली बार 1989 के चुनाव में भदोही और औराई विधानसभा क्षेत्र से एक-एक महिला ने ताल ठोकी थी। चुनावों में दो महिलाओं को जीत भी मिल चुकी है। महिला, पुरुष मिलाकर कुल 587 उम्मीदवार अब तक के चुनावों में भाग्य आजमा चुके हैं। निर्वाचन से जुड़े आंकड़ों पर गौर करें तो 1952 के चुनाव में यहां दो सीट हुआ करती थी। उसमें एक तो सीट ज्ञानपुर ईस्ट और दूसरी ज्ञानपुर नार्थ इस्ट। दोनों सीटों पर मिलाकर कुल 21 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन महिला कोई नहीं थी। इसके बाद 1957 के चुनाव में ज्ञानपुर सीट ही रही। उसमें भी कोई महिला उम्मीदवार नहीं आया। 1962 में भदोही और ज्ञानपुर, 1967 में भदोही, ज्ञानपुर और औराई सीटों पर चुनाव हुए, लेकिन कोई महिला उम्मीदवार नहीं आई। 1985 के चुनाव तक यहीं दशा रही। 1989 के चुनाव में ज्ञानपुर से 16 पुरुष उम्मीदवार मैदान में आए, जबकि भदोही से 15 पुरुष उम्मीदवार रहे, जिसमें एक महिला, औराई से कुल 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान थे, जिसमें एक महिला उम्मीदवार ने भागीदारी की। हालांकि उस चुनाव में दोनों महिलाएं हार गईं। पहली बार जब भदोही से सुमित्री चुनावं लड़ीं तो उन्हें 0.22 मत ही मिले थे, जबकि औराई से ताल ठोकने वाली दुर्गा को 1.16 फीसदी वोट मिले थे। विधानसभा चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट से पहली बार 2017 के चुनाव में दो महिलाओं ने दावेदारी की। दोनों चुनाव हार गईं। यहां से अब तक 200 उम्मीदवारों में से दो महिलाएं ही लड़ी हैं। जबकि भदोही से 1989 में एक, 1996 में एक, 2007 में तीन, 2012 में दो ओर 2017 में दो महिलाएं चुनाव लड़ी हैं। इसी तरह औराई विधानसभा से अब तक कुल 206 लोग चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें दस महिलाएं रही हैं। यहां से 1989, 1991, 1993 और 2007 में एक-एक, 2012 में चार और 2017 में दो महिलाएं चुनाव लड़ चुकी हैं। अब तक के चुनावों में दो महिलाएं कुल तीन बार विधायक बनी हैं। पहली बार 2007 में औराई विधानसभा क्षेत्र से अर्चना सरोज विधायक बनीं थी। उसके बाद 2009 में हुए उपचुनाव में वहीं से मधुबाला विधायक बनीं। 2012 के चुनाव में मधुबाला औराई से चुनाव लड़ीं और विधायक बनीं। इसके साथ ही कई बार रनरअप भी महिला प्रत्याशी रही हैं।
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