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कछुआ सेंचुरी में मछली मारने का अवैध कारोबार

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प्रतिबंध के बाद भी गंगा में कछुआ सेंचुरी घोषित क्षेत्रों में अवैध तरीके से मछली पकड़ने का काम चल रहा है। वन विभाग के अधिकारी भी मौन साधे हैं। जिससे सरकारी व्यवस्था सवालों के कटघरे में खड़ी होती दिख रही है। गंगा में बाढ़ के बावजूद भी मछली मारने का धंधा बेरोकटोक जारी है जबकि करवधिया, अरई, खेमापुर, महादेवा, दुगुना, परसनी, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, शेरपुर, बहपूरा, भदराव, धनतुलसी, कलातुलसी, हरिरामपुर, भुर्रा, छेछुआ, कलिक कवैया, बसगोती मवैया, मवैयाथान सिंह, इटहरा, पश्चिमवाहिनी, सोनपुर, मनीपुर तलवां, डीघ, दस्युपुर, बनकट, सीतामढ़ी, नारेपार और बारीपुर आदि गावों के गंगा घाटों और गंगा में मछली मारने तथा किसी भी प्रकार के खनन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। नियम के मुताबिक गंगा में जाल तक नही डाला जा सकता है। लेकिन यहां का एक सफेद पोश यह गैर कानूनी कार्य को खुले आम अंजाम देने में लगा है। न तो वन विभाग और न पुलिस के लोग इस गैर कानूनी काम को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठा रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कोनिया के गंगा में प्रतिदिन मारी जाने वाली कई क्विंटल मछलियां गाड़ियों में भर कर आजमगढ़ की मंडी में भेजी जाती हैं। अवैध कार्य में क्षेत्र के ही एक सफेदपोश का हाथ बताया जा रहा है। बता दें कि रामनगर वाराणसी से कछुआ सेंचुरी भदोही, मिर्जापुर और प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में हस्तांतरित कर दिया गया है। वन विभाग प्रयागराज नेपिछले महीने ही सीतामढ़ी गंगा शमशान घाट पर 462 कछुए गंगा नदी में छोड़े गए थे। जिसके बाद से ही कछुआ सेंक्चुरी के लिए संरक्षित किए गए गंगा में खनन और मछली मारने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था लेकिन कोनिया के गंगा घाटों पर सरकारी फरमान की धज्जियां बेखोफ हो कर उड़ायी जा रही है। प्रतिबंधित क्षेत्र में गंगा में जाल डालकर मछली मार कर अवैध रूप से आजमगढ़ के मांस मंडियों में काफी ऊंचे दाम पर भेजी जा रही है। ग्रामीणों ने कछुआ सेंक्चुरी क्षेत्र में गंगा में जलीय जीवों मछली का अवैध शिकार कर मंडियों में भेजने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की है। वन विभाग हंडिया के रेंजर संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि कछुआ सेंक्चुरी क्षेत्र में खनन और मछली मारना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। कहा कि जिस कोनिया क्षेत्र का गंगा क्षेत्र भदोही जनपद के बन विभाग के क्षेत्र में आता है। भदोही के डीएफओ नीरज कुमार आर्य ने कहा कि इस संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त नहीं है। कछुआ सेंक्चुरी क्षेत्र में अगर गंगा में मछली मार कर बाहर भेजी जा रही है तो उस पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाया जाएगा।
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