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Bhadohi News: हम होश में आने ही वाले थे कि तुम फिर मुस्कुरा बैठे...

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सुरियावां में वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान दिवस पर कवि सम्मेलन में काव्य पढ़ते कवि। स्रोत आयोजक
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सुरियावां। नगर के एक कांप्लेक्स में रविवार शाम को वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान दिवस पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवि एवं साहित्यकारों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर लोगों को भाव विभोर किया। शुभारंभ अरुण कुमार यादव ने सरस्वती वंदना से की। गजलकार अजय विश्वकर्मा ने पढ़ा... उसे तो चलना था दरियाव की रवानी सा, सिमट के रह गया बस एक बूंद पानी सा...। डाॅ. सुरेश पांडेय मंजुल ने सुनाया गीत वही जो गाया जाए, मीत वही जो साथ निभाए। वीर वही जो मातृभूमि पर शीश चढ़ाए...। डॉ. अंजना कुमार ने सुनाया तुम्हारी मुस्कुराहट पर हम होश गंवा बैठे। हम होश में आने ही वाले थे कि तुम फिर से मुस्कुरा बैठे। नरेंद्र बहादुर सिंह पंकज ने सुनाया कि अगर हम वतन की हिफाजत से चूके तो सूरज की बाकी किरन क्या रहेगी...। कवि संदीप कुमार बालाजी ने सुनाया रक्त कुंड में मंड चढ़ा मिट्टी का मोल चुकाते हैं। मातृभूमि पर मरने वाले कभी न करने पाते हैं। कर्मराज यादव किसलय ने कहा कि 36 फिरंगियों को एक साथ मौत के घाट उतारने वाली वीरांगना ऊदा देवी युगों-युगों तक याद की जाएंगी। मध्य प्रदेश से आए सत्येंद्र शुक्ल सजग, जौनपुर कवियित्री सुमति श्रीवास्तव, आनंद गुप्ता गांधी, प्रयाग से सुरेश केसरवानी, भदोही से प्रसिद्ध व्यंग- गीतकार चंद्रकांत, अभिषेक, शेख सलीम, मनोज पाल आदि ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं का संचार किया। इस मौके पर मंगल सरोज, कृष्णानंद सरोज, योगेंद्र प्रताप श्रीवास्तव, दिनेश सरोज, राजेश सरोज आदि माैजूद रहे।
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