भदोही। जिले समेत पूरे देश में करीब 20 लाख लोगों को रोजगार देने वाले कालीन उद्योग को सरकार से रियायत की उम्मीद है। कालीन उद्योग से जुड़े बुनकरों को उप्र पावर लूम और हैंडलूम बुनकरों की तरह स्थायी रेट पर बिजली उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से चल रही है। समय-समय पर ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन (एकमा) की ओर से इसको लेकर प्रयास भी किया जा रहा है। सोमवार को राज्यमंत्री दानिश आजाद के साथ एकमा के मानव सचिव असलम बाबू की भेंट के बाद इसको लेकर आस जगी है।
एकमा के मानद सचिव असलम महबूब ने बताया कि राज्यमंत्री का मांग को लेकर सकारात्मक रूख रहा है। जिस तरह से वाराणसी से बुनकरों को अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना का मिलता है। उसी तरह अगर भदोही के कालीन बुनकरों और कताई मजदूरों को भी यह लाभ मिले तो कालीन उद्योग में नई जान आ सकती है। कालीन उद्योग एक बड़े वर्ग को रोजगार उपलब्ध कराता है। आंकड़ों की माने तो करीब 20 लाख लोग इस उद्योग से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। जिले में भी इनकी संख्या करीब लाखों में है। कालीन उद्योग को लेकर योजना का लाभ मिलता है तो जिले में हजारों बुनकर और मजदूर इससे लाभान्वित हो सकेंगे। जिले में कालीन बुनाई में प्रयुक्त होने वाले कच्चे यार्न को बिजली चालित कताई मशीनों से प्रोसेस करने के बाद बुनाई में प्रयुक्त किया जाता है। इसके अलावा पावरलूम का उपयोग बुनाई में भी तेजी से बढ़ रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद में सैकड़ों ऐसे मजदूर हैं, जो बिजली चालित कताई मशीनों से यार्न तैयार कर आपूर्ति करते हैं। ये कताई मजदूर और बुनकर महंगे दर पर बिजली का इस्तेमाल करते हैं। नगर के कताई मजदूर मसूद आलम, मूलचंद दूबे ने बताया कि आज कालीन उद्योग संकट में जरूर है। काम भी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन अगर इस योजना को कालीन उद्योग पर लागू किया जाता है तो केवल हम लोगों को नहीं, बल्कि बड़े वर्ग को इसका लाभ मिलेगा।