सदर पशु अस्पताल में बिक्री के लिए आए मीठे ज्वार बीज के पैकेट को दिखाते चीफ फार्मासिस्ट एसबी सिंह।
- फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से पंजीकृत लगभग दो लाख पशुओं की सेहत अब मीठे ज्वार से सुधरेगी। इसके लिए पशुपालन विभाग अपने 11 अस्पतालों पर 30 किलोग्राम की दर से 3.30 क्विंटल मीठे ज्वार का बीज भी उपलब्ध करा दिया है। बीज का वितरण प्रति किलोग्राम 41 रुपये की दर से शुरू हो गया है। 25 बीघे में इसकी बोआई करायी जाएगी। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ने पालतू और छुट्टा पशुओं के रखरखाव के साथ हरे चारे की उपलब्धता के लिए निर्देश जारी किया है। 36 छोटे-बड़े गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षण ले रहे पांच हजार पशुओं को पूरे वर्ष तक उपलब्ध रहने वाली नेपियर घास की रोपाई आगामी दिनों में करायी जाएगी। यह घास गोवंश आश्रय स्थलों में ही लगायी जाएगी। नगर और ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालक 25 बीघे के रकबे में मीठे ज्वार बीज की बोआई जून के प्रथम सप्ताह तक तक कर सकते हैं। एक बिस्वे में मीठे ज्वार का बीज पांच सौ ग्राम पर्याप्त होगा। बोआई के समय किसानों को ध्यान देना होगा कि बोआई वाले खेत की मृदा शक्ति कमजोर न हो। मृदा शक्ति कमजोर होने की स्थिति में प्रति बिस्वा बीज दर सवा किलोग्राम तक लग सकता है। मृदा शक्ति भरपूर रहने पर पांच सौ ग्राम बीज प्रति बिस्वे के लिए अधिक चारा देने वाला साबित होगा। पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली भी अजीब ही है। गर्मी के मौसम में क्रीमी नाशक दवाओं की उपलब्धता तो भरपूर मात्रा में किया है लेकिन सात वर्ष से एक भी पशु अस्पतालों पर एंटी रैबिज की डोज नहीं है। प्रतिदिन पशुपालक मौसमी बीमारियों से पीड़ित पशुओं को लेकर अस्पताल आते हैं जिन्हें चिकित्सक क्रीमीनाशक की पुड़िया के साथ बाहर से दवा लेने की पर्ची पकड़ाते हैं। जबकि गर्मी अधिक होने से कुत्तों में पागलपन की शिकायत बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में पशुपालक अपने ही पशुओं को बचाने में असमर्थ होते हैं। अस्पतालों में एंटी रैबिज इंजेक्शन न होने के कारण बाहर से किसान खरीदकर लगवाते हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.जय सिंह ने कहा कि एंटी रैबिज समेत अन्य दवाओं की डिमांड निदेशालय से की जा चुकी है।