उन्होंने बताया कि संसार का निर्माण भगवान ने किया जिसमें सबसे पहले
प्रकृति की संरचना हुई। प्रकृति ने ईश्वर के सहायक की भूमिका निभाते हुए
श्रृष्टि का निर्माण किया। ईश्वर ने प्रसन्न होकर यह दुनिया सृष्टि को सौंप
दी और कहा कि अब से तुम ही उद्भव पालन एवं समन करो मैं सिर्फ दृष्टा बनकर
देखूंगा। समय के चक्र ने मानव प्रजाति को ऐसा मूर्ख बना दिया कि वह प्रकृति
का दोहन करने लगे। इससे ईश्वर के साथ प्रकृति भी कुपित होने लगे। जिसका
असर हिमस्खलन, सूनामी, भूकंप आदि देखा जाता है। हमें चाहिए कि हम प्रकृति
की सेवा से संरक्षण करें और सच्चा सुख प्राप्त करें।