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बाहरी आडंबरों के नहीं भाव के भूखे हैं भगवान : प्रज्ञा

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गोपीगंज। नगर के रामलीला मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस बृहस्पतिवार को कथा व्यास सुश्री प्रज्ञा ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता, रुक्मिणी विवाह और भक्ति की महिमा की कथा सुनाई। कथा व्यास ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता धन-दौलत नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण पर आधारित होती है। श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन मित्र सुदामा का जिस प्रकार सम्मान किया, वह मानवता और मित्रता का सर्वोच्च उदाहरण है। रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए प्रज्ञा ने बताया कि श्रीकृष्ण ने धर्म और प्रेम की रक्षा के लिए रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया।
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