गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 80 मीटर को पार कर 80.940 मीटर तक पहुंच गया। बृहस्पतिवार को एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से पानी कम हो रहा है। बृहस्पतिवार को जलस्तर 80.700 तक पहुंच गया है। पानी कम होने से दुर्गंध और कीचड़ से लोग परेशान हैं। जिले में गंगा का दायरा करीब 45 किमी के क्षेत्र में है। इससे सटे 45 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब दस दिनों से रूक-रूककर हो रही बारिश और दूसरे नदियों से पानी छोड़ने से गंगा का पानी तेजी से बढ़ा। जलस्तर बढ़ने से इटहरा, कलिकमवैया समेत दर्जन भर गांव की कई बस्तियां प्रभावित हो गईं। बड़ी संख्या में लोग आश्रय स्थलों और करीबियों के यहां शरण लिए हुए हैं। बृहस्पतिवार से गंगा के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। जिसके कारण बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बस्तियों से खिसकना शुरू हो गया है। कई क्षेत्रों में अब भी जलजमाव की समस्या कायम है। विशेषज्ञों की माने तो अभी बाढ़ का खतरा टला नहीं है। जगह जगह हो रही भारी बारिश, यमुना और टौंस नदियों में उफान को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि गंगा में बाढ़ की स्थिति बनी रह सकती है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी कार्यालय के अनुसार बुधवार आधी रात तक जल स्तर में वृृद्धि होती रही और पानी 80.940 मीटर पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद वृद्धि रुक गयी और तीन घंटे तक ठहराव के पश्चात जल स्तर में कमी आने लगी। बृहस्पतिवार को दोहपर तक पानी घट कर 80.700 मीटर पर आ गया है। औराई के बरजी, मूलापुर, रामपुर घाट से लेकर जहांगीराबाद आदि गांव में सैकड़ों बीघे फसल गंगा बाढ़ से नष्ट हो चुकी है।