ज्ञानपुर। जल संरक्षण की मुहिम का कालीन नगरी में असर भी दिख रहा है। सरोवरों के निर्माण, अच्छे मानसून के कारण कालीन नगरी के भूगर्भ जलस्तर में सुधार हुआ। इससे 2015 में डार्क जोन में शामिल जिला 2022 में इस सूची से बाहर हो गया। इसके बाद नि: शुल्क बोरिंग पर लगी रोक को भी हटा दिया गया। गर्मी शुरू होते ही पेयजल संकट को देखते हुए शासन स्तर से पूरे जिले को करीब आठ वर्ष पहले डार्क जोन घोषित कर दिया गया था। बोरिंग योजनाओं पर भी रोक लगा दी गई थी। हालांकि मनरेगा के तहत तालाबों की खोदाई और वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम व सोख्ता गड्ढों के निर्माण, जन जागरूकता अभियान का परिणाम रहा है कि जलस्तर में सुधार हुआ। 2022 में शासन ने सभी छह ब्लॉकों को डार्क जोन से बाहर कर दिया। सहायक अभियंता लघु सिंचाई श्रीमती ऋतु ने कहा कि शासन-प्रशासन की ओर से हुए प्रयास से जलस्तर में काफी सुधार हुआ। इससे साल 2022 में जिला डार्कजोन से बाहर आ गया। ज्ञानपुर। जल संरक्षण को लेकर सरकार भले ही गंभीर है, लेकिन सरकारी विभागों में ही उसका पालन नहीं हो पाता। कलेक्ट्रेट और विकास भवन को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी यह व्यवस्था नहीं की गई। इससे जल संरक्षण की मुहिम को झटका लगता है। अभोली ब्लॉक के कनकपुर निवासी मैराथन धावक नायब बिंद जल संरक्षण के लिए नेहरू युवा केंद्र एवं वाजर एड इंडिया के साथ मिलकर सात वर्षों से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने साल 2018 में जल संरक्षण के लिए भदोही से दिल्ली तक दौड़ लगाकर लोगों को जागरूक किया। 2021 में वाटर एड इंडिया एवं जिला प्रशासन की ओर से भदोही से लखनऊ तक जल मैराथन कर लोगों को जल संरक्षण का संदेश दिया। इसके लिए जल मंत्री संग केंद्रीय जल मंत्रालय से सम्मान भी मिल चुका है। अब नायब अपने गांव में ही एक बदहाल हो चुके तालाब का श्रमदान से जीर्णोद्धार करने में जुटे हैं ताकि बारिश का पानी उसमें संरक्षित किया जा सके।