आरोपियों ने बताया कि धान खरीद का लक्ष्य मिलने के बाद परिचित व्यक्तियों का आधार लगाकर फर्जी तरीके से किसान बनाकर रजिस्ट्रेशन कर सत्यापन कर दिया। बताया कि विपणन कार्यालय के कंप्यूटर आपरेटर से पासवर्ड से लेकर एडीएम, एसडीएम ज्ञानपुर, भदोही, औराई का पासवर्ड रिसेट कर सत्यापन कर दिया। इस काम में कई अन्य लोग भी सहयोग करते थे। लेकिन नवंबर में जांच शुरू होने पर सत्यापन बंद कर दिया गया।
आईडी हैक करने वाले गिरोह का पर्दाफाश होने पर विपणन विभाग एक बार फिर सवालों में घिर गया है। लक्ष्य के मुकाबले खरीद न होने के पीछे यह भी कारण सामने आ रहा है। राइस मिलरों से तालमेल बिठाकर सरकारी एजेंसियों का बंटाधार कर दिया जाता है। कंप्यूटर आपरेटर की संलिप्तता ने मामले को और भी बल दे दिया
। करीब दो साल पूर्व मिर्जापुर में एक व्यापारी की हत्या के बाद भी कार्यालय की धुकधुकी बढ़ गई थी, हालांकि बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। साइबर सेल और पुलिस मामले की तह तक पहुंचे तो कई निरीक्षकों संग अफसरों की गर्दन फंसनी तय है।