ज्ञानपुर। सामूहिक दुष्कर्म समेत अन्य मामलों में आरोपी ज्ञानपुर के बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र को आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी पाया गया है। इस मामले में कोर्ट ने दो साल और छह महीने की सजा सुनाई है। एमपी-एमएलए कोर्ट में न्यायिक अधिकारी साधना गिरी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। सोमवार को वह कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश हुए। गोपीगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष कपिलदेव त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि विजय कुमार मिश्र के पास शस्त्र लाइसेंस है। इनकी आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने 28 जुलाई 2010 को लाइसेंस निरस्त करते हुए रिवाल्वर व राइफल को थाने के मालखाने में जमा कराने का निर्देश दिया था। लेकिन, जमा नहीं किया। इसके बाद विजय कुमार मिश्र के कौलापुर और खपटियां आवास पर नोटिस चस्पा किया गया। इसके बाद भी असलहे जमा नहीं करने पर वर्ष 2011 में इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में पुलिस ने आर्म्स एक्ट की धारा में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। एमपी-एमएलए कोर्ट की न्यायिक अधिकारी साधना गिरी ने विजय कुमार मिश्र को आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार अर्थदंड जबकि आयुध अधिनियम की धारा 30 के तहत छह माह की सजा और पांच हजार जुर्माना लगाया। मामले में अभियोजन पक्ष से पैरवी सहायक अभियोजन अधिकारी मुकेश मिश्र ने किया।
विजय मिश्र पर दर्ज हैं 83 मुकदमे
ज्ञानपुर। सामूहिक दुष्कर्म समेत अन्य मामलों में आरोपी ज्ञानपुर के बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र को आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी पाया गया है। पूर्व विधायक विजय मिश्र वर्तमान में आगरा जेल में निरुद्ध हैं। उसके खिलाफ 83 मुकदमे दर्ज हैं। इसमें लूट, हत्या, धमकी, वाराणसी की गायिका की ओर से सामूहिक दुष्कर्म सहित अन्य मुकदमे शामिल हैं। पूर्व विधायक पर वर्ष 2020 में रिश्तेदार ने संपत्ति हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया था। उसके बाद सामूहिक दुष्कर्म, धमकी सहित 12 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए। उन्हें मध्य प्रदेश के आगर से गिरफ्तार किया गया था।
चार बार रहे ज्ञानपुर के विधायक
ज्ञानपुर। जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से विजय मिश्र चार बार विधायक रहे। तीन बार सपा और चौथी बार निषाद पार्टी से विधायक चुने गए थे। ज्ञानपुर विधानसभा पर आजादी के बाद कोई दोबारा विधायक नहीं हुआ, लेकिन विजय मिश्र इस सीट से चार बार विधायक हुए। आरोप लगते रहे कि वह बाहुबल से जीत दर्ज करते रहे। 2017 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने टिकट काट दिया था। तब पार्टी से बगावत कर निषाद पार्टी से चुनाव लड़कर जीता। हालांकि 2022 के चुनाव में निर्दल चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
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