भदोही के सलाबत खां में बदहाल तालाब। संवाद
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ज्ञानपुर। जल संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर है। गांवों में करोड़ों खर्च कर अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं, लेकिन शहरी इलाकों में 100 से 150 साल पुराने ऐतिहासिक तालाबों की सुध नहीं ली जा रही है। कोई तालाब गंदगी से पट चुका है तो कहीं की जर्जर सीढ़ियां टूट चुकी हैं। भदोही, ज्ञानपुर, सुरियावां, गोपीगंज और घोसिया नगर में कई तालाब सुंदरीकरण का इंतजार कर रहे हैं तो कुछ अतिक्रमण के चलते अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गए हैं। नगर के मध्य में स्थित ज्ञान सरोवर का निर्माण करीब 100 साल पूर्व महाराजा काशी नरेश ने कराया था। देखरेख न होने से सरोवर की दशा खराब हो चुकी है। प्रमुख धार्मिक स्थल हरिहरनाथ मंदिर के सामने तालाब होने से हर रोज सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। पूर्व में सैकड़ों लोग तालाब की सीढ़ियों पर टहलते भी थे, लेकिन कुछ माह पूर्व टूटी सीढ़ियां आज तक दुरुस्त नहीं हो सकी हैं। साफ-सफाई की मुक्कमल व्यवस्था न होने से जगह-जगह घासफूस उग आए हैं, श्रद्धालु दर्शन करने के बाद तालाब के पास सेल्फी लेने जाते हैं। लेकिन तालाब की क्षतिग्रस्त सीढ़िया देखकर वापस चले आते हैं। सभासद रंजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन तालाब के सुंदरीकरण को लेकर पहल नहीं की गई। भदोही। नगर के बाजार सलाबत खां स्थित छितनी तालाब की हालत दयनीय हो चुकी है। जिसमें न केवल गंदा पानी बहाया जा रहा है, बल्कि चकरा आदि भी फेंका जाता है। स्थानीय लोगों की माने तो एक दशक पूर्व तालाब में लोग नहाने आते थे, लेकिन जैसे-जैसे तालाब में गंदगी बढ़ी लोग आना बंद कर दिए। नगर के घमहापुर स्थित तालाब हाजी फरीदन दशकों पुराना है, जो नगर क्षेत्र में होते हुए बदहाली का शिकार है। नगर पालिका द्वारा कभी तालाबों के सुंदरीकरण की ओर ध्यान नहीं दिया गया। आलम यह है कि तालाब दूषित पानी एकत्रित करने का स्थान बन चुका है।