ज्ञानपुर। सत्र न्यायाधीश (एचजेएस) दुर्ग नारायण सिंह की अदालत ने बुधवार को गैर इरादतन हत्या के दोषी चार अभियुक्तों को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने चारों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें 20 हजार रुपये मृतक के परिजनों को दिए जाने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक औराई कोतवाली के गिर्दबड़ागांव निवासी चन्द्रशेखर दुबे ने 12 अगस्त, 2012 को कोतवली में तहरीर दी थी। तहरीर में आरोप लगाया था कि उसके पड़ोसी गांव ठेघीपुर के निवासी विजयधर पाल, मंगरू पाल, बैजनाथ और सभाजीत जमीन विवाद को लेकर खेत में बोया चरी काटने लगे। इसे लेकर चंद्रशेखर के भाई सूरज दुबे ने आपत्ति जताई तो चारों दोषियों ने गालीगलौज करते हुए लाठी-डंडे से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
अगल-बगल के लोगाें ने किसी तरह बीच बचाव कर उनके भाई को अस्पताल पहुंचाया। एक नवंबर 2012 को वाराणसी में इलाज के दौरान सूरज की मौत हो गई थी। पीड़ित की मौत के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और विवेचना के बाद कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में सुनवाई करते हुए सत्र न्यायाधीश (एचजेएस) दुर्ग नारायण सिंह की अदालत ने चारों अभियुक्तों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया। कोर्ट ने चारों को पांच साल की कैद की सजा सुनाने के साथ ही चारों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि से 20 हजार रुपये मृतक के परिजनों को दी जाए।