देशी मार्केट के लिए बनाए अपने उत्पाद दिखाते सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य दर्पण बरनवाल
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भदोही। कोरोना के चलते देश में 2019, 2020 और 2021 तीन साल इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन नहीं हो सका। जर्मनी में 2021 में डोमोटेक्स फेयर नहीं हो सका था और अगले वर्ष के डोमोटेक्स में भागीदारी से कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने हाथ खींच लिए हैं। ऐसे में अब कालीन निर्यातक अन्य एक्सपो में फोकस कर रहे हैं। 30 नवंबर से ग्रेटर नोएडा में होने वाले फेयर होम डेकर गिफ्ट एंड हाउसवेयर (एचजीएच इंडिया-2021) में लोग दांव लगा रहे हैं। यह फेयर डोमेस्टिक मार्केट को बूस्ट करने के लिए है। एचजीएच का यह दसवां संस्करण होगा। एक दशक में एचजीएच इंडिया डोमेस्टिक मार्केट को तेज करने के लिए अच्छा प्लेटफार्म है। सीईपीसी हमेशा से मानती आई है कि निर्यात के साथ साथ डोमेस्टिक मार्केट को भी प्रदर्शनी के जरिए उठाया जा सकता है। एचजीएच इंडिया भदोही के कई निर्यातकों के लिए अच्छा प्लेटफार्म सिद्ध हुआ है। मुंबई, नई दिल्ली, बंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद के कंज्यूमरों को टारगेट कर गिफ्ट्स, कालीन व दरियां, बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों से एचजीएच इंडिया में भाग ले रहे सीईपीसी के प्रशासनिक समिति के सदस्य, दर्पण बरनवाल ने कहा कि देशी और विदेशी बाजारों को साथ साथ लेकर नहीं चला जा सकता है। दोनो के अलग टेस्ट को ध्यान में रख कर उत्पाद बनाने से दोनो ही बाजारों को टारगेट किया जा सकता है। खास बात यह है कि इसमे हर प्रकार के ग्राहकों का आना होगा। विशेष रूप से ऐसे लोग जिनमे कालीन, दरी जैसे आईटम खरीदने की क्षमता हो। बताया कि हमारे उत्पाद 100 रुपये प्रति वर्ग फीट से लेकर 400 रुपये कीमत तक के हैं। जिसमे एक से एक डिजाईन, रंगों और पैटर्न के हस्तनिर्मित कालीन और दरियां शामिल हैं।