भदोही। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 43बी में खंड (एच) को लेकर कालीन कारोबारी मुखर हो रहे हैं। सोमवार को आल इंडिया कारपेट यार्न स्पिनर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन (एसिस्डा) प्रतिनिधियों ने धारा को कालीन निर्यातकों के साथ साथ यार्न कारोबारियों के लिए घातक बताया। एसिस्डा अध्यक्ष धर्मपाल गुप्ता ने केंद्रीय वित्त और वाणिज्य मंत्री को ज्ञापन भेजकर अधिनियम में संशोधन की मांग की है। अध्यक्ष ने बताया कि भदोही देश के कालीन कारोबार का मुख्य केंद्र है। इस कारोबार में निर्यातक ही नहीं बुनकर, रंगाई कारीगर, धागा निर्माता, कच्चे माल के व्यापारी समेत विभिन्न राज्यों के मजदूर जुड़े हुए हैं। किसी एमएसएमई से खरीदे गए माल का भुगतान 15 से 45 दिन में संभव नही है जैसा कि इस नियम में लिखा है। क्योंकि कालीन तैयार होकर विदेशों के भेजे जाने के बाद ही भुगतान हो पाता है। जिसमे 5 महीने तक का समय लग जाता है। कहा कि इस नियम से केवल निर्यातकों को ही नहीं धागा कारोबारियों पर भी व्यापक असर पड़ेगा। ऐसे में आयकर की नई धारा 43 (बी) एच कहीं से भी लागू किए जाने योग्य नहीं है। कहा कि इस नियम से भदोही-मिर्जापुर कालीन परिक्षेत्र में सैकड़ो यार्न कारोबारियों का धंधा चौपट हो जाएगा।