ज्ञानपुर। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया कि जनपद में संस्थागत प्रसव कम है, जो उचित नही है। जिन आशाओं की ओर से प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराया जा रहा है, चिन्हित कर कार्रवाई की जाए। वे शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक हुई। इसमें स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। कहा कि इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को सभी को स्वस्थ्य रखने का दायित्व है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक से लेकर पैरामेडिकल कर्मी अपने दायित्व बोध के साथ काम करें। कहा कि जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक है, जो चिंता का विषय है। इसे रोके बिना स्वास्थ्य विभाग की परिकल्पना पूर्ण नहीं हो सकती। एएनएम और आशा गांव में स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन की मुख्य धूरी है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी उनके कार्यों की समीक्षा करें। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई भी की जाए। स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, एएनएम, आशा बहू, आशा संगनियों को अब विशेष ध्यान रखकर दायित्व बोध के साथ काम करना होगा। इसके लिए उन्होंने जिले की हर गर्भवती महिलाओं से लेकर नवजात शिशुओं को सूचीबद्ध करना होगा। समय से टीकाकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उन्हें समय से इलाज मुहैया कराकर स्वस्थ्य बनाना होगा। टीकाकरण की समीक्षा के दौरान कई क्षेत्रों में लिस्ट सही न बनने पर नाराजगी जताते हुुए सुधार की हिदायत दी। डीएम ने एनआरसी में अति कुपोषित बच्चों को समय से भर्ती करने एवं उनके उपचार के लिए कहा। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकरण के संचालित अल्ट्रासाउंड पर सख्ती की जाए। कोविड टीकाकरण की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी नेे समस्त अधीक्षकों को निर्देश दिया कि 12 वर्ष से ऊपर टीकाकरण से वंचित सभी लोगों को सूचीबद्ध कर टीकाकरण कराना सुनिश्चित करें।