ज्ञानपुर। आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कागजों में हो रहा है। अधिकारियों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। डीएम आर्यका अखौरी के निर्देश पर 12 मई को अफसरों की टीम ने सत्यापन किया तो केंद्रों की पोल पट्टी खुल गई। जांच आख्या के आधार पर चार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की संविदा समाप्त करने की संस्तुति की गई जबकि 75 का मानदेय रोका गया। लापरवाही में तीन सुपरवाइजर की वेतन वृद्धि रोक दी गई। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से 1435 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से धात्रियों, गर्भवती और बच्चों को पोषाहार का वितरण किया जाता है। 12 मई को डीएम के निर्देश पर अधिकारियों की टीम ने 91 आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। इसमें 25 केंद्र बंद मिले, सात विलंब से खुले, पांच आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकर्ता अनुपस्थित रहीं जबकि चार पर पोषाहार का वितरण सही नहीं मिला। इसी तरह 15 केंद्रों पर अभिलेखों का रख-रखाव सही नहीं मिला। 90 केंद्रों में मात्र 15 पर स्थिति ठीक मिली, शेष 75 केंद्रों पर कुछ न कुछ कमियां मिलीं। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह के निर्देश पर 75 केंद्रो की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का मानदेय रोका गया। ज्ञानपुर के जखांव में अफसरों की जांच में केंद्र ही नहीं मिले। इस पर डीपीओ को दुबारा जांच करने का निर्देश दिया। चार केंद्रों पर पोषाहार वितरण न होने पर वहां की आंगनबाड़ी और सहायिकाओं की सेवा समाप्त करने की संस्तुति की गई। अभिलेखों का रख-रखाव सही न मिलने पर 15 केंद्रो पर आंगनबाड़ी-सहायिका और सुपरवाइजर का मानदेय रोका गया जबकि वर्ष 2021-22 और 2022-23 में 54 केंद्रों का सत्यापन न करने पर सुपरवाइजर की वेतन वृद्धि रोकी गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिया कि संबंधित केंद्रों की दुबारा जांच करें। अगर व्यवस्था में सुधार न हो तो विधिक कार्रवाई करें।